कपसाड़ गांव छावनी में तब्दील... बढ़ा सियासी तनाव, हत्या के बाद अपहृत बेटी का अब तक नहीं मिला सुराग, परिवार को मिला लिखित वादा!

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Published By Muskan Dixit
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मेरठः मेरठ जिले के सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में अनुसूचित जाति की महिला सुनीता की क्रूर हत्या और उनकी 18 वर्षीय बेटी रूबी के अपहरण ने पूरे प्रदेश की सियासत को हिला दिया है। गुरुवार सुबह हुई इस वारदात के बाद शुक्रवार को भी पुलिस को अपहृत युवती का कोई सुराग नहीं मिल सका। नामजद आरोपियों पारस सोम, सुनील और उनके साथियों की गिरफ्तारी भी नहीं हो सकी।

इस पूरे घटनाक्रम ने गांव को एक छावनी में बदल दिया। गांव की सीमा से ढाई किलोमीटर पहले ही बैरिकेडिंग कर पुलिस ने घेराबंदी कर रखी थी। एसएसपी, एसपी देहात, एसपी ट्रैफिक, चार सीओ, 20 इंस्पेक्टर, 150 दरोगा और कुल 500 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ आरआरएफ की टीम भी तैनात रही।

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सत्ता और विपक्ष आमने-सामने  

शुक्रवार सुबह से ही सपा, बसपा, भीम आर्मी और असपा के नेता-कार्यकर्ता गांव पहुंचने की कोशिश में जुटे रहे। सपा विधायक अतुल प्रधान को पुलिस ने गांव की सीमा पर रोक दिया, जिसके बाद वे सड़क पर धरने पर बैठ गए। विधायक ने कहा,  “अगर यह मामला किसी अन्य समुदाय का होता, तो अब तक बुलडोजर चल चुका होता। सरकार विपक्ष की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। हम पीड़ित परिवार के साथ न्याय की लड़ाई अंत तक लड़ेंगे।”

करीब डेढ़ घंटे की नारेबाजी और तनाव के बाद मृतका सुनीता के पति सतेंद्र और बेटे नरसी भी धरने पर पहुंचे। सबसे दिल दहला देने वाला पल तब आया जब नरसी रोते हुए विधायक अतुल प्रधान से लिपटकर बोला, “विधायक जी, बस इतना बता दो… मेरी बहन वापस आएगी या नहीं?” इस सवाल ने मौके पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।

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परिवार का अडिग रुख और अंतिम संस्कार में देरी  

परिजनों ने साफ कहा था कि जब तक बेटी रूबी नहीं मिल जाती, सुनीता का अंतिम संस्कार नहीं होगा। बृहस्पतिवार रात 12 बजे शव गांव पहुंचने के बाद भी परिवार अड़ा रहा।

प्रशासन का लिखित वादा और अंतिम संस्कार  

करीब 19 घंटे की गहन वार्ता के बाद पूर्व विधायक संगीत सोम, एसपी देहात अभिजीत कुमार और एडीएम सिटी की मौजूदगी में पुलिस ने परिवार को लिखित आश्वासन दिया:  

- 48 घंटे के भीतर रूबी को तलाश कर लिया जाएगा  
- परिवार के एक सदस्य को स्थानीय चीनी मिल में स्थायी नौकरी  
- 10 लाख रुपये का चेक तत्काल दिया गया  
- परिवार के एक सदस्य को शस्त्र लाइसेंस दिलाया जाएगा  
- गांव में स्थायी पुलिस सुरक्षा व्यवस्था  

इस वादे के बाद रात करीब 7:45 बजे सुनीता का अंतिम संस्कार हो सका। बेटे नरसी ने मुखाग्नि दी।

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क्या हुआ था वारदात?  

गुरुवार सुबह सुनीता अपनी बेटी रूबी के साथ खेत जा रही थीं। इसी दौरान गांव के ही पारस सोम, सुनील और उनके साथियों ने फरसे से हमला कर सुनीता की हत्या कर दी और रूबी का अपहरण कर फरार हो गए। उपचार के दौरान मोदीपुरम अस्पताल में सुनीता ने दम तोड़ दिया।

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डिजिटल इंडिया में भी पुलिस छावनी

गांव की गलियों में डीआईजी कलानिधि नैथानी, जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार और एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने खुद फ्लैग मार्च निकाला। प्रशासन ने परिवार से पांच दौर की बंद कमरे में बातचीत की।

यह मामला अब केवल एक हत्या-अपहरण की घटना नहीं रहा—यह दलित परिवार के न्याय, सुरक्षा और सियासी समीकरणों की जंग बन चुका है। अगले 48 घंटे तय करेंगे कि प्रशासन का वादा कितना मजबूत साबित होता है।

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