Makar Sankranti 2026 : तिल द्वादशी और वृद्धि योग के संयोग में मनेगी मकर संक्रांति, 15 जनवरी को मनाया जाएगा पर्व

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Published By Deepak Mishra
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कानपुर, अमृत विचार। मकर संक्रांति पर्व इस बार विशेष संयोग पर पड़ रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पर्व पर ग्रहों के मिलन से तिल द्वादशी और वृद्धि योग का संयोग बन रहा है। मान्यता है कि इस संयोग पर पुण्य स्नान और दान का दोगुना महत्व हासिल होता है। उधर ज्योतिषाचार्यों ने इस बार मकर संक्रांति पर्व 15 जनवरी को मनाया जाना उचित बताया गया है।

ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि सनातन धर्म में पर्व-व्रत निर्धारण के लिए ऋषियों द्वारा प्रतिपादित व्यवस्था के अनुकूल सूर्य सिद्धांतादि पारंपरिक गणित के आधार पर 14 जनवरी बुधवार की रात 9 बजकर 39 मिनट पर सूर्यदेव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। संक्रांति का पुण्यकाल संक्रांति के समय से 16 घंटे आगे तक रहता है। इस दृष्टि से पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा और दोपहर 1 बजकर 39 मिनट तक इसका पुण्यकाल होगा।

15 जनवरी की सूबह  सूर्योदय से दोपहर 1 बजकर 39 मिनट तक स्नान-दान का पर्व होगा। यह भी बताया कि 14 जनवरी  को रात में 9 बजकर 39 मिनट पर सूर्य देव मकर राशि में गोचर करेंगे। रात्रि के समय में संक्रांति हो रही है. इस वजह से मकर संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी को सूर्योदय के बाद से होगा।

निर्णय सिंधु के अनुसार भी इस बार की मकर संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी को प्राप्त हो रहा है क्योंकि सूर्य का प्रवेश मकर राशि में रात के समय हो रहा है। ऐसे में मकर संक्रांति 15 जनवरी गुरुवार को मनाना शास्त्र सम्मत है। मकर संक्रांति के दिन माघ कृष्ण द्वादशी तिथि है, उस दिन षट्तिला एकादशी का पारण है। 

इस बार भ्रम की स्थिति

पर्व के बारे में ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि कुछ पंचांग में मकर संक्रांति का समय 14 जनवरी को दोपहर में 3 बजकर 13 मिनट  पर बताया गया है और उसका पुण्य काल 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक है। इस वजह से लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। हालांकि कई जगहों पर लोग 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाते हैं, चाहें सूर्य गोचर कभी भी हो लेकिन यह उचित नहीं है क्योंकि मकर संक्रांति का पर्व सूर्य की संक्रांति पर निर्भर करता है न कि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 14 या 15 जनवरी को।

मकर संक्रांति पर खिचड़ी दान को ग्रह दोष शमन के लिए श्रेष्ठ माना गया है। विशेषकर चावल और उड़द दाल का दान अत्यंत शुभ फल प्रदान करता है। मकर संक्रांति पर यदि एकादशी का संयोग हो, तो शास्त्रों के अनुसार चावल ग्रहण व दान वर्जित माना जाता है। ऐसी स्थिति में भी मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाना उचित रहेगा क्योंकि उस दिन द्वादशी है और खिचड़ी का दान और सेवन किया जा सकता है।

इस बार बना विशेष संयोग

इस वर्ष मकर संक्रांति पर तीन शुभ योगों की युति बन रही है, जिससे पर्व का पुण्यफल कई गुना बढ़ गया है। संयोगवश इसी दिन माघ मास की तिल द्वादशी भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ कृष्ण द्वादशी को भगवान विष्णु के शरीर से तिल की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए इस दिन तिल का दान और तिल का सेवन अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इसके साथ ही पर्व के दिन वृद्धि योग का संयोग भी बन रहा है। ज्योतिष शास्त्रों में वृद्धि योग को शुभ कार्यों, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष फलदायी बताया गया है। माघ मास में मकर संक्रांति का पड़ना स्वयं में शुभ माना जाता है।

मकर संक्रांति स्नान-दान मुहूर्त

मान्यतानुसार स्नान और दान के लिए सूर्योदय काल का समय उत्तम माना गया है। उसमें भी ब्रह्म मुहूर्त तो सर्वोत्तम होता है। ऐसे में देखा जाए तो 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना सही है। उस दिन प्रातः काल मुहूर्त में स्नान और दान करें। 15 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन पुण्य काल दोपहर में 1 बजकर 39 मिनट तक है। ऐसे में मकर संक्रांति का स्नान और दान सूर्योदय से लेकर दोपहर 1 बजकर 39 मिनट तक कर सकते हैं।

2 फरवरी से मांगलिक कार्य

मकर संक्रांति से हर बार मांगलिक कार्यों की भी शुरुआत होती है लेकिन इस बार दो फरवरी के बाद ही शुभ और मांगलिक कार्य शुरू होंगे। ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि इस बार शुक्र अस्त होने के कारण मकर संक्रांति से मांगलिक कार्य नहीं शुरू होंगे। शुक्र उदय होने के बाद दो फरवरी से मांगलिक कार्य हो सकेंगे।

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