किसानों को घर बैठे मिलेगा मुआवजा, अगले माह से पूरी तरह डिजिटल होगा सीएम कृषक दुर्घटना कल्याण योजना
लखनऊ, अमृत विचार: सरकार मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। राजस्व परिषद द्वारा संचालित इस योजना के डिजिटलीकरण की समय-सीमा फरवरी तय की गई है। प्रक्रिया पूरी होते ही योजना का संचालन पूरी तरह ऑनलाइन हो जाएगा, जिससे दुर्घटना की स्थिति में किसान परिवारों को बिना किसी भागदौड़ के घर बैठे मुआवजे का लाभ मिल सकेगा।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में राजस्व परिषद के अधिकारियों ने बताया कि डिजिटलीकरण के बाद आवेदन, दस्तावेज अपलोड, सत्यापन, स्वीकृति और सहायता राशि के भुगतान की पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी। इससे योजना का संचालन अधिक समयबद्ध, प्रभावी और पारदर्शी बन सकेगा, साथ ही भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी की संभावनाओं पर भी अंकुश लगेगा। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के तहत राजस्व परिषद योजना को आधुनिक डिजिटल स्वरूप देने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के सहयोग से एक नया वेब पोर्टल और सॉफ्टवेयर विकसित कर रहा है। अभी तक योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन लिए जाते थे, लेकिन कई प्रक्रियाएं भौतिक सत्यापन के कारण लंबित रहती थीं। इससे किसान परिवारों को तहसील और जिला कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे।
नए पोर्टल के माध्यम से पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद आवेदन की स्थिति को ट्रैक करना, दस्तावेजों का सत्यापन और सहायता राशि का सीधे बैंक खाते में हस्तांतरण संभव होगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि किसानों का प्रशासन पर भरोसा भी और मजबूत होगा।
29,394 किसानों को मिला लाभ, लखनऊ मंडल शीर्ष पर
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में की गई थी। राजस्व परिषद की मण्डलवार रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2025 तक लगभग 29,394 किसानों के आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें सबसे अधिक 3,569 आवेदन लखनऊ मंडल, 3,143 गोरखपुर मंडल, जबकि अयोध्या और कानपुर मंडल में क्रमशः 2,491 और 2,436 आवेदन स्वीकृत हुए हैं। यह योजना दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में किसानों और उनके परिजनों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच है। इसके तहत पात्र किसानों को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
