मास्टर माइंड ने 5 वर्ष में बनाई करोड़ों की संपत्ति, सरकारी विभागों में फर्जी भर्ती मामले में ED की छापेमारी के बाद हुआ खुलासा
लखनऊ, अमृत विचार: सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे बड़े जालसाजी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसका मुख्य केंद्र गोरखपुर रहा। यहां रेलवे में फर्जी तरीके से नौकरी दिलाने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड के बारे में जानकारी मिली। गिरोह का मास्टरमाइंड राघवेंद्र शुक्ल उर्फ मनीष उर्फ अनिल पांडेय निकला।
जांच में सामने आया है कि इंटर पास अनिल ने महज पांच साल के भीतर करोड़ों रुपये की संपत्ति खड़ी कर ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को शक है कि यह पूरी संपत्ति रेलवे समेत अन्य सरकारी विभागों में फर्जी नियुक्ति के नाम पर की गई ठगी से अर्जित की गई है।
ईडी के मुताबिक, अनिल बांसगांव के फुलहर खुर्द गांव का रहने वाला है। ईडी की टीम ने उसके गांव स्थित मकान पर छापा मारकर करीब आठ घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान उसके भाई और अन्य परिजन से आय से अधिक संपत्ति को लेकर सवाल-जवाब किए गए। ईडी ने परिवार के सभी सदस्यों के बैंक खातों की छायाप्रति भी कब्जे में ली है। पूछताछ में पता चला कि अनिल ने संस्कृत विद्यालय अम्मरपुर, बांसगांव से 12वीं तक पढ़ाई की। इसी दौरान गांव के एक युवक के जरिए उसे रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा कराने वाली एजेंसी में नौकरी मिल गई। यहीं से उसका संपर्क बिहार के उस गिरोह से हो गया, जो नौकरी में फर्जीवाड़ा करता था।
बताता था प्रॉपर्टी डीलर, युवकों के खाते में भेजता था रुपये
ईडी की जांच में सामने आया कि जालसाज गिरोह से जुड़ने के बाद अनिल का गांव आना-जाना कम हो गया। जब भी वह आता, बांसगांव कस्बे और गांव में खुद को प्रॉपर्टी डीलर बताता था। गांव वालों ने पूछताछ में बताया कि वह हमेशा लग्जरी गाड़ियों में आता था और हर बार गाड़ी बदली हुई होती थी। जांच में यह भी सामने आया है कि अनिल ने अपने गांव और आसपास के दो-तीन गांवों के कुछ युवकों के संपर्क में था। उनके बैंक खातों में रुपये भेजता था और फिर कमीशन देकर नकद वापस ले लेता था। ईडी अब यह मिलान कर रही है कि किस खाते में कब और कितनी रकम ट्रांसफर हुई।
प्रयागराज और बिहार से खुली परतें
अनिल का नाम सबसे पहले प्रयागराज में नौकरी दिलाने के नाम पर नौ लाख रुपये की ठगी के मामले में सामने आया था। इस केस में पकड़े गए बिहार के दीपक तिवारी ने अनिल को पूरे गिरोह का सरगना बताया था। इसके बाद ईडी ने उसे अपने रडार पर लिया। कौशांबी के एक युवक की शिकायत पर प्रयागराज के पूरामुफ्ती थाने में दर्ज एफआईआर में अनिल समेत चार आरोपियों को नामजद किया गया था।
100 करोड़ से ज्यादे का हुआ लेन-देन
जांच में सामने आया कि फर्जी नियुक्ति के नाम पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की रकम अलग-अलग खातों में जमा होने के सबूत मिले हैं। इसी आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह रेलवे के अलावा अन्य सरकारी विभागों में भी फर्जी नियुक्ति का रैकेट चला रहा था। फर्जी जॉइनिंग लेटर, फर्जी ट्रेनिंग सेंटर, नकली आईडी कार्ड और सरकारी ईमेल जैसी दिखने वाली फर्जी ईमेल आईडी तक बनाई जाती थीं।
फर्म बनाकर मंगाते थे रुपये, गुजरात से जुड़े तार
आरोपी फर्जी जीएसटी पर रजिस्टर्ड फर्म बनाकर उम्मीदवारों से रुपये मंगवाते थे। नौकरी को असली दिखाने के लिए 2-3 महीने तक मेसर्स ट्रेजरी ऑफिस आरओ, मेसर्स एफसीआई आरओ, आरआरबी, बाय सैलरी जैसे नामों से वेतन भी भेजा जाता था। वेतन आने के बाद उम्मीदवारों को लगता था कि उनकी नौकरी लग गई है, इसके बाद आरोपी संपर्क तोड़ लेते थे। आरोपी ठगी की रकम सीधे गुजरात के राजकोट स्थित एक खाते में जमा कराता था। यह खाता अनिल पांडेय और उसके एक साझेदार के नाम पर संचालित था। ईडी अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
