बाराबंकी में दवाएं जलती देख भड़के पशुपालक, औषधालय बना शोपीस, कार्रवाई की मांग

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Published By Anjali Singh
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बाराबंकी,  अमृत विचार। राजकीय पशु औषधालय त्रिवेदीगंज पशुपालकों के लिए शोपीस बनकर रह गया है। एक ओर जहां पशुपालक इलाज के अभाव में अपने पशुओं को मरते हुए देखने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पताल परिसर में बड़ी मात्रा में पशुओं की दवाएं आग में जलती देख क्षेत्र के किसानों और पशुपालकों में भारी आक्रोश फैल गया। सोमवार की देर शाम अस्पताल परिसर से धुआं उठता देख कुछ ग्रामीण मौके पर पहुंचे। 

वहां देखा गया कि पशुओं की दवाओं को आग के हवाले किया जा रहा है। जानकार पशुपालकों के अनुसार आग में जलाई जा रही दवाओं में कीड़ा मारने की दवा अल्बेंडाजोल तथा बुखार की टीप (इंजेक्शन) शामिल थीं, जिन पर वर्ष 2025 की एक्सपायरी डेट अंकित थी। तेजवापुर के प्रधान पति संजय वर्मा और राघवपुर निवासी राजकुमार ने आरोप लगाया कि पशुपालकों को समय पर दवाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, जबकि लाखों रुपये की दवाएं आग में जलाई जा रही हैं। 

उन्होंने कहा कि दवाओं के अभाव में क्षेत्र में सैकड़ों पशु खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों के चलते मौत का शिकार हो चुके हैं। इस पूरे मामले पर जब राजकीय पशु औषधालय की चिकित्साधिकारी डॉ. इंदूबाला से जानकारी चाही गई तो उन्होंने घटना से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। घटना के बाद पशुपालकों में रोष व्याप्त है और उन्होंने मामले की जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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