धर्मांतरण प्रकरण के बाद KGMU में प्रशासनिक फैसला, क्लीनिकल पैथोलॉजी की 3 डॉक्टरों में बांटी गई जिम्मेदारी
लखनऊ, अमृत विचार : केजीएमयू प्रशासन ने चर्चित धर्मांतरण प्रयास और यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में एक और अहम कदम उठाया है। जांच में किसी भी तरह के व्यवधान की आशंका को देखते हुए क्लीनिकल पैथोलॉजी, ट्रॉमा, ओपीडी समेत अन्य पैथोलॉजी इकाइयों की जिम्मेदारी में बड़ा बदलाव किया गया है। अब यह जिम्मेदारी तीन डॉक्टरों को दी गई है।
पैथोलॉजी विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉ. रमीज पर महिला रेजिडेंट के साथ यौन उत्पीड़न और शादी के लिए धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप हैं। मामले की जांच विभिन्न एजेंसियां कर रही है। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कई संगठनों ने क्लीनिकल पैथोलॉजी के इंचार्ज को पद से हटाने या स्थानांतरित करने की मांग की थी।
इसी के चलते केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने बुधवार को क्लीनिकल पैथोलॉजी की जिम्मेदारी में बदलाव के आदेश जारी किए। अब क्लीनिकल पैथोलॉजी, ट्रॉमा, ओपीडी और पीआरओ कार्यालय के पास स्थित सेंट्रल सैंपल कलेक्शन यूनिट की जिम्मेदारी डॉ. रश्मि कुशवाहा को सौंपी गई है। वहीं डॉ. मिली जैन और डॉ. पूजा शर्मा को फैकल्टी इंचार्ज नियुक्त किया गया है।
प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय जांच की निष्पक्षता बनाए रखने और कार्य व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने के उद्देश्य से लिया गया है। पैथोलॉजी विभाग के लैब इंचार्ज पद से डॉ. वाहिद अली को हटा दिया गया है। इससे जुड़ा आदेश बुधवार को कुलपति प्रो.सोनिया नित्यानंद की ओर से जारी कर दिया गया है। डॉ. वाहिद पर राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने रमीज मलिक से लगातार संपर्क में रहने का आरोप लगाया था।
