जंगल की दुनिया: पर्पल फ्रॉग (बैंगनी मेढक): धरती का रहस्यमय जीव

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Published By Anjali Singh
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पर्पल फ्रॉग, जिसे हिंदी में बैंगनी मेढक कहा जाता है, प्रकृति के सबसे अद्भुत और रहस्यमय जीवों में से एक है। इसका वैज्ञानिक नाम नासिकाबत्रेकस सह्याद्रेंसिस (Nasikabatrachus sahyadrensis) है। यह दुर्लभ प्रजाति केवल भारत के पश्चिमी घाट क्षेत्र में पाई जाती है, जो अपनी जैव-विविधता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।

बैंगनी मेढक का शरीर अन्य मेढकों से बिल्कुल अलग होता है। इसका रंग गहरा बैंगनी, शरीर गोल-मटोल और थूथन सूअर की नाक जैसा दिखाई देता है। इसकी आंखें छोटी होती हैं और मुंह संकरा, जिससे यह जमीन के नीचे रहने के लिए पूरी तरह अनुकूलित है। यह मेढक अपने जीवन का अधिकांश समय भूमिगत बिताता है और आमतौर पर इंसानों की नजरों से दूर रहता है।

पर्पल फ्रॉग की सबसे अनोखी विशेषता इसका जीवन-चक्र है। यह साल में केवल मानसून के कुछ ही दिनों के लिए जमीन के ऊपर आता है। इसी दौरान यह प्रजनन करता है। नर मेढक की आवाज तेज और अनोखी होती है, जो जमीन के नीचे से भी सुनाई देती है। इसके टैडपोल चट्टानों से चिपककर बहते पानी में विकसित होते हैं, जो इसे अन्य प्रजातियों से अलग बनाता है।

इसका मुख्य भोजन दीमक और छोटे कीड़े होते हैं, जिन्हें यह अपनी लंबी, चिपचिपी जीभ से पकड़ता है। जंगलों में रहने वाली इडुकी इन्हें कई पीढ़ियों से जानते और समझते हैं। माना जाता है कि इन जीवों का प्राचीन वंश लगभग 12 करोड़ वर्षों से स्वतंत्र रूप से विकसित हो रहा है, और इन्होंने नए महाद्वीपों के निर्माण, महान डायनासोर के विनाश, हिमयुग और मनुष्यों के प्रमुख प्रजाति बनने जैसी घटनाओं को जीवित रहते हुए देखा है। वैज्ञानिकों के लिए यह गोंडवानालैंड नामक महाद्वीप के अस्तित्व का एक महत्वपूर्ण जैविक प्रमाण हैं।

आज पर्पल फ्रॉग संकटग्रस्त (Endangered) प्रजातियों की सूची में शामिल है। जंगलों की कटाई, सड़क निर्माण और मानवीय गतिविधियों के कारण इसका प्राकृतिक आवास तेजी से नष्ट हो रहा है। ऐसे में इस अनोखे जीव का संरक्षण न केवल पर्यावरण संतुलन के लिए आवश्यक है, बल्कि हमारी प्राकृतिक धरोहर को बचाने की जिम्मेदारी भी है।

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