National Startup Day : PM मोदी ने की राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस की शुरुआत, कहा- भारतीयों द्वारा भारतीय सर्वरों पर तैयार हो स्वदेशी एआई

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भविष्य में किसी देश को आगे रखने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता में क्रांति जरूरी होगी और इसलिए हमारा प्रयास होना चाहिए कि स्वदेशी एआई भारतीयों द्वारा भारतीय सर्वरों पर ही तैयार हो। 

पीएम मोदी ने यहां भारत मंडपम् में स्टार्टअप इंडिया मिशन के 10 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि पिछले 10 साल में देश में एक ऐसा वातावरण तैयार हुआ है जो नवाचार को बढ़ावा देता है। सरकार ने विश्वास और पारदर्शिता का माहौल बनाया है। जन विश्वास कानून बनाया है। स्टार्टअप के लिए कई कानूनों में स्व-प्रमाणन की सुविधा दी गयी है ताकि स्टार्टअप का समय मुकदमेबाजी में बर्बाद न हो। 

इससे पहले पीएम मोदी ने कुछ स्टार्टअप कंपनियों के स्टॉल पर जाकर उनके द्वारा किये जा रहे काम के बारे में जाना। इसके बाद कुछ स्टार्टअप ने मंच से अपनी यात्रा और स्टार्टअप इंडिया मिशन से मिले लाभ के बारे में बताया।  मोदी ने कहा कि आज का अनुसंधान ही कल की बौद्धिक संपदा बनती है। जो देश एआई की क्रांति में जितना आगे होगा वह उतनी ही लाभ की स्थिति में होगा। 

कार्यक्रम में मौजूद स्टार्टअप का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, "यह काम आपको करना होगा। इंडिया एआई मिशन के जरिये 38 हजार से अधिक जीपीयू को ऑनबोर्ड किया है। हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि स्वदेशी एआई भारतीयों द्वारा भारतीय सर्वरों पर ही तैयार हों।" 

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का नौजवान आज खिंची-खिंचाई लकीर पर आराम से अपनी जिंदगी गुजारने के लिए तैयार नहीं है। वह अपने लिए नये रास्ते खुद बनाना चाहता है। उन्होंने कहा कि जोखिम लेने वालों को अब सम्मान मिलता है और यह अब फैशन बन रहा है। 

इसी संदर्भ में अपनी सरकार की काम करने की शैली का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, "जोखिम लेना मेरी भी आदत रही है। जिन कामों को दशकों से किसी ने नहीं छुआ, जिनके लिए लोग कहते थे कि राजनीतिक जोखिम है, मैं उन्हें अपना दायित्व समझकर जरूर करता हूं। नुकसान होगा तो मेरा होगा, लेकिन अगर फायदा होगा तो देश के करोड़ों परिवारों का होगा।" 

मोदी ने कहा कि स्टार्टअप इंडिया मिशन ने देश में एक नयी संस्कृति को जन्म दिया है। पहले नया कारोबार केवल बड़े-बड़े घरों के बच्चे ही लेकर आते थे क्योंकि उन्हें ही आराम से फंडिंग मिलती थी। गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चे सिर्फ नौकरी की सोच सकते थे। स्टार्टअप इंडिया ने इसे बदल दिया। आज टीयर-2 तथा टीयर-3 शहरों और गांवों के बच्चे भी स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं। आज 45 प्रतिशत मान्यता प्राप्त स्टार्टअप में कम से कम एक की निदेशक या सहसंस्थापक महिला है। महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है। प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप को सरकार से साथ मिलने का भरोसा दिलाया। 

उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, हमें वैश्विक नेतृत्व का लक्ष्य रखना होगा। आप नये आइडिया पर काम करें, समाधान खोजने पर काम करें। आप विनिर्माण पर फोकस करें। आपके हर प्रयास में सरकार आपके साथ खड़ी है। मुझे आपकी क्षमता पर विश्वास है। हमारा लक्ष्य होना चाहिये कि आने वाले 10 साल में भारत नये स्टार्टअप ट्रेंड और प्रौद्योगिकी में दुनिया का नेतृत्व करे। 

उन्होंने कहा कि पहले स्टार्टअप स्थापित कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा की सोच भी नहीं सकते थे। आज 200 स्टार्टअप अंतरिक्ष क्षेत्र में काम कर रहे हैं। ड्रोन सेक्टर में पुराने पड़ चुके कानून हटाकर सरकार ने स्टार्टअप पर भरोसा किया। आज 35 हजार छोटी कंपनियां और स्टार्टअप जैम पोर्टल पर पंजीकृत हैं। 

उन्होंने कहा कि पूंजी के बिना सबसे अच्छे आइडिया भी बाजार तक नहीं पहुंच सकते। इसलिए सरकार ने स्टार्टअप के लिए पूंजी की व्यवस्था की है। स्टार्टअप को विभिन्न योजनाओं के तहत सीड फंडिंग दी जा रही है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि साल 2016 में जब स्टार्टअप इंडिया मिशन शुरू हुआ तो देश में सिर्फ 400 स्टार्टअप हुआ करते थे। आज उनकी संख्या दो लाख से अधिक हो चुकी है। अनुमान है कि इन स्टार्टअप्स ने अब तक 21 लाख लोगों को नौकरी दी है। वे आज 50 क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। 

सरकार ने साल 2016 में 10 हजार करोड़ रुपये का फंड ऑफ फंड्स बनाया था। पिछले बजट में 10 हजार करोड़ रुपये के एक और फंड ऑफ फंड्स की घोषणा की गयी है। डीप टेक रिसर्च के लिए एक लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की घोषणा की गयी है। उन्होंने कहा कि पूरा विश्व आत्मविश्वास से भरपूर एक नये भारत की तरफ उम्मीद से देख रहा है। अनुमान है कि लगभग 100 देश भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के साथ अपना नेटवर्क बनाना चाहते हैं।  

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