Bareilly : गन्ने के बीच उगेगा मुनाफा, उड़द-मूंग से बदलेगी किसानों की तकदीर

Amrit Vichar Network
Published By Pradeep Kumar
On

कृषि और गन्ना विभाग की संयुक्त पहल, बढ़ाएंगे दलहन का रकबा

बरेली, अमृत विचार। जिले में दलहन फसलों के घटते रकबे और दालों के उत्पादन में आ रही गिरावट को देखते हुए कृषि विभाग और गन्ना विभाग ने संयुक्त रूप से एक नई पहल की शुरुआत की है। जिसके तहत गन्ने की खेती के साथ सहफसली प्रणाली अपनाते हुए उड़द और मूंग की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा।

इस समय जनपद में करीब सवा लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती हो रही है, जबकि गेहूं दूसरे स्थान पर है, जिसका रकबा एक लाख हेक्टेयर के आसपास रहता है। गन्ना नकदी फसल होने के कारण किसानों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो रही है, वहीं इसकी लंबी अवधि की खेती के चलते दलहन जैसी अल्पकालिक फसलें पीछे छूट रही हैं। ऐसे में सहफसली खेती का विकल्प किसानों के लिए एक व्यावहारिक समाधान के रूप में सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार गन्ने के साथ उड़द और मूंग की सहफसली खेती से किसानों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिलेगा और दलहन उत्पादन भी बढ़ेगा। योजना के तहत एक किसान को एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए अधिकतम 20 किलोग्राम उड़द और 20 किलोग्राम मूंग का बीज निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। कृषि वैज्ञानिक डाॅ. रंजीत सिंह बताते हैं कि दलहन फसलें नाइट्रोजन स्थिरीकरण के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती हैं, जिससे अगली फसलों की पैदावार पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। सहफसली प्रणाली से खेतों में कीट व रोगों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम होता है। इस प्रयास से जिले में दलहन फसलों का रकबा बढ़ेगा, किसानों की आय में वृद्धि होगी व दालों की स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।

किसान और जमीन दोनों के लाभकारी है सहफसली खेती
जिला गन्ना अधिकारी दिलीप सिंह का कहना है कि सहफसली खेती किसानों के साथ भूमि के लिए भी लाभकारी सिद्ध हो रही है। कम लागत में किसान एक ही समय में दो फसलों का उत्पादन कर अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। विभाग की ओर से फरवरी-मार्च माह में ट्रेंच विधि से गन्ना बुवाई के साथ सहफसली खेती अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

गन्ने के साथ उड़द की खेती से बढ़ेगी आमदनी
जिला कृषि अधिकारी ऋतुषा तिवारी बताती हैं कि उड़द ऐसी दलहन फसल है जो कम अवधि में तैयार हो जाती है और गन्ने की शुरुआती बढ़वार के समय खेत में उपलब्ध खाली स्थान का सही उपयोग सुनिश्चित करती है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय के साथ भूमि की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिलती है। उड़द की किट किसानों को निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए किसानों को कृषि विभाग के दर्शन-2 पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। चयनित किसानों को फसल उत्पादन से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

संबंधित समाचार