बहराइच में दहशत का पर्याय बना बाघ पिंजरे में कैद, वन विभाग की टीम ने किया सफल रेस्क्यू
बहराइच। उत्तर प्रदेश में बहराइच जिले के महसी थाना क्षेत्र अंतर्गत रेहुआ मंसूर गांव के पास 72 घंटे से ग्रामीणों में दहशत का कारण बने एक बाघ को वन विभाग की टीम ने सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत पिंजरे में कैद कर लिया है। वन विभाग के अनुसार बीते सोमवार को बाघ ने एक सांड का शिकार किया था, जिसके बाद ग्रामीणों ने इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दी।
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और लगातार तीन दिनों तक बाघ की तलाश की जाती रही। बाघ अपनी जगह लगातार बदलता रहा और कभी गन्ने के खेतों तो कभी नदी के किनारे झाड़ियों में छिपता रहा। शनिवार को बाघ ने अपनी पुरानी जगह रेहुआ मंसूर छोड़कर करीब 500 मीटर दूर आजाद नगर बसीना माफी के पास शरण ली।
वन विभाग की विशेष टीम ने आधुनिक ड्रोन कैमरों की मदद से झाड़ियों में छिपे बाघ की सटीक लोकेशन ट्रेस की। गुरुवार मध्यरात्रि दुधवा टाइगर रिजर्व से सुलोचना और डायना नामक दो प्रशिक्षित हथिनियों को कॉम्बिंग के लिए बुलाया गया था।
साथ ही दुधवा के विशेषज्ञ डॉ. दयाशंकर तथा कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के डॉ. दीपक के नेतृत्व में विशेष टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान संभाली। दोपहर करीब 3:30 बजे बाघ के घेराबंदी में फंसते ही विशेषज्ञों की टीम ने सटीक निशाना लगाकर उसे ट्रैंकुलाइज किया। बेहोश होते ही बाघ को सुरक्षित तरीके से पिंजरे में डाल दिया गया।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण भी मौके पर मौजूद रहे। रेंजर शकीब अंसारी ने बताया कि बाघ का रेस्क्यू पूरी तरह सफल रहा है और इस दौरान किसी को कोई चोट नहीं आई। पकड़े गए बाघ को आगे की जांच और स्वास्थ्य परीक्षण के लिए वन विभाग द्वारा सुरक्षित स्थान पर भेजा जा रहा है।
