बैंक ऑफ बड़ौदा पर फूटा लोगों का गुस्सा, बैंक मित्र और अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज हुआ धोखाधड़ी का मामला

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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बैंक ऑफ बड़ौदा के खिलाफ दर्जनों खाताधारकों ने बैंक के मुख्य गेट पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया और आक्रोश में आकर बैंक का शटर गिरा दिया।

लखनऊ, काकोरी, अमृत विचारः पारा थाना क्षेत्र स्थित डॉ0 शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद आज खाताधारकों का गुस्सा फूट पड़ा। फर्जीवाड़े के शिकार दर्जनों खाताधारकों ने बैंक के मुख्य गेट पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया और आक्रोश में आकर बैंक का शटर गिरा दिया।

पीड़ित खाताधारक राम सिंह यादव निवासी ग्राम सलेमपुर पतौरा ने थाना पारा में दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि बैंक मित्र शिवा राव एवं वर्ष 2020 से कार्यरत अन्य अज्ञात अधिकारियों व कर्मचारियों ने मिलकर फर्जी बिल-वाउचर और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए उनके खाते से लाखों रुपये निकाल लिए। उनके खाते से 8 लाख 60 हजार रुपये की अवैध निकासी की गई, जबकि 10 लाख रुपये की फर्जी एफडी बनाकर दी गई और 10 लाख रुपये किसी अन्य व्यक्ति के नाम से जमा कर निकाल लिए गए।

शिकायत के अनुसार, इसी तरह दर्जनों खाताधारकों- जिनमें छात्र, गरीब व मध्यम वर्गीय लोग शामिल हैं-के खातों से हजारों से लेकर लाखों रुपये तक की रकम हड़प ली गई। आरोप है कि बैंक द्वारा जानबूझकर लेन-देन के मैसेज भी खाताधारकों को नहीं भेजे गए, ताकि धोखाधड़ी लंबे समय तक छिपी रहे। मामले में यह भी गंभीर आरोप सामने आया है कि घोटाले का खुलासा होने पर साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से बैंक में जानबूझकर आग लगाई गई, जिससे बैंक की सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा। घोटाले से नाराज खाताधारकों ने आज बैंक पहुंचकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अपना पैसा वापस दिलाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान बैंक परिसर में तनाव की स्थिति बनी रही। सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया। पीड़ितों ने बैंक मित्र शिवा राव एवं अन्य अज्ञात बैंक अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, साजिश, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और साक्ष्य नष्ट करने जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

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