खत्म हुई नगर निगम और वन विभाग की बीच चल रही खींचतान, इस विभाग को मिली बंदरों के आतंक को संभालने की जिम्मेदारी
लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में बंदरों को पकड़ने और उनके प्रबंधन को लेकर चल रही नगर निगम और वन विभाग की खींचतान पर आखिरकार विराम लग गया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह साफ रूप से तय कर दिया गया है कि बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी अब वन विभाग की होगी। शासन की ओर से इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। बंदरों का आतंक केवल राजधानी लखनऊ तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे प्रदेश में इसकी शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। ऐसे में नगर निगम और वन विभाग के बीच यह तय नहीं हो पा रहा था कि बंदरों को पकड़ने का दायित्व किसका है।
दोनों विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे, जिसे लेकर कई बार पत्राचार भी हुआ। मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद शासन ने हस्तक्षेप किया। शनिवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस मुद्दे का समाधान निकाल लिया गया। प्रमुख सचिव पी गुरु प्रसाद ने बताया कि बैठक में यह साफ किया गया कि बंदर वन्यजीव हैं और उनकी प्रवृत्ति पालतू पशुओं जैसी नहीं होती। इसलिए उनके प्रबंधन और रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम के दायरे में नहीं आती।
बैठक में निर्णय लिया गया कि बंदरों को पकड़ने और उन्हें वापस वन क्षेत्रों में छोड़ने की जिम्मेदारी वन विभाग की होगी। इसके तहत पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को बंदरों के पकड़ने और प्रबंधन की पूरी कार्यवाही सौंपी गई है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि वन विभाग एक महीने के भीतर बंदरों के प्रबंधन के लिए कार्ययोजना तैयार करे। आवश्यकता पड़ने पर अन्य विभागों से भी सहयोग लिया जाएगा। शासन के इस फैसले से उम्मीद है कि प्रदेशवासियों को बंदरों के बढ़ते आतंक से जल्द राहत मिलेगी।
