कानपुर : नगर निगम में निजीकरण के विरोध में छह घंटे चला धरना प्रदर्शन, नगर आयुक्त ने वार्ता
आरोप है कि निजीकरण कर हजारों कर्मचारियों का मारा जा रहा है हक
कानपुर, अमृत विचार। शहर की सफाई व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी नगर निगम ने की है और इसके लिए टेंडर भी निकल दिए गए हैं। इस बात की जानकारी पर कर्मचारी काफी आक्रोशित है और अपना हक मांगने के लिए वह सोमवार को नगर निगम मुख्यालय पहुंचे और यहां पर नगर आयुक्त से मुलाकात का प्रयास किया, लेकिन सफाई कर्मियों व कर्मचारियों नेताओं को उनसे मिलने नहीं दिया गया। इसके बाद सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी मुख्यालय के गेट पर धरने पर बैठे और करीब छह घंटे तक अपनी हक के लिए आवाज बुलंद की। तब जाकर नगर आयुक्त ने पांच लोगों को अपने बगले में बुलाकर वार्ता की।
नगर निगम ने शहर की सफाई समेत सभी कार्यों का जिम्मा निजी कंपनी को देने का फैसला किया है, जिसकी जानकारी पर सोमवार को दोपहर करीब 12 बजे सफाई कर्मी नगर निगम मुख्यालय पहुंचे और प्रथम तल में स्थित नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के कार्यालय गए। उनके कार्यालय में न होने पर सफाई कर्मियों ने पूरे परिसर में घूमकर कार्य बंद करा दिया और अधिकांश दफ्तर बंद करा दिए।
इसके बाद सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी नगर निगम गेट के बाहर बैठकर धरना प्रदर्शन कर नारेबाजी। संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति नगर निगम व जलकल की ओर से आम सभा हुई। यह धरना प्रदर्शन व सभा शाम को करीब पांच बजे तक चला और सफाई व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपे जाने का सफाई कर्मचारियों ने विरोध किया।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि नगर निगम लगातार निजीकरण कर रहा है और कर्मचारियों का हक मार रहा है। इसके विरोध में उन्होंने अधिकारियों को अपना ज्ञापन दिया और मांगे रखी, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अधिकारियों ने समय न होने की बात कही।
कर्मचारी नेता रमाकांत के मुताबिक नगर निगम में निजीकरण हावी करने के लिए टेंडर निकाले गए हैं। इसके विरोध में नगर निगम के सभी संगठनों ने एक संयुक्त मोर्चा बनाया है और अधिकारियों से मिलकर पांच सूत्री ज्ञापन दिया है। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि वह नगर आयुक्त से मिलकर अपनी मांगे रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें समय नहीं मिल सका। जब तक नगर निगम में निजीकरण को बंद नहीं किया जाएगा, कर्मचारियों का विरोध जारी रहेगा। जरूरत पड़ने पर आंदोलन भी किया जाएगा।
मानव तस्करी की ओर नगर निगम
कर्मचारी नेता रमाकांत के मुताबिक नगर निगम में आउट सोर्सिंग पर कर्मचारी काम कर रहे हैं। वह पूरे समर्पण के साथ काम कर रहे हैं और स्वच्छता में कानपुर की रैंकिंग भी सबसे बेहतर रही है। आधिकारियों के निर्देश पर कार्य किए जा रहा है। लेकिन इसके बाद भी निजीकरण करते हुए इन कर्मचारियों को दूसरी कंपनी को सौंपने की तैयारी हो रही है। उन्होंने कहा कि यह सब मानव तस्करी की श्रेणी में आता है और नगर निगम में ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।
नगर आयुक्त ने मांगा एक सप्ताह का समय
कर्मचारी नेता किशन लाल सुदर्शन, रमाकांत मिश्रा व हरिओम वाल्मीकि के मुताबिक हजारों की संख्या में कर्मचारी की भीड़ को देखकर नगर आयुक्त ने अपने बंगले में वार्ता आमंत्रित की, लेकिन वार्ता ज्यादा सफल नहीं हो सकी है। नगर आयुक्त ने मामले में एक सप्ताह का समय मांगा है, जिस पर कर्मचारी नेताओं ने 27 जनवरी को दोबारा आम सभा बुलाकर मांगों का समाधान न होने पर आंदोलन की घोषणा की है, जिसके अंतर्गत प्रदर्शन और आम कार्यबंदी हो सकती है। कहा कि अगर ऐसा होता है तो उसका उत्तर दायित्व नगर निगम प्रशासन का होगा। इस दौरान जयपाल सिंह, कमरुद्दीन, अजीत बाघमार, उस्मान अली शाह, मुकेश वाल्मीकि, सीएल बघेल, रामप्रकाश भारती समेत हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।
