कानपुर : एसआईटी के हत्थे चढ़ा डिग्रियां बांटने वाला एक और जालसाज, 2012 से सक्रिय है गिरोह

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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कानपुर, अमृत विचार। बीटेक, बीफार्मा-डीफार्मा और एलएलबी समेत अन्य पाठ्यक्रमों की डिग्रियां मुहैया कराने वाले गिरोह एक और जालसाज जूही गौशाला पर एसआईटी के हत्थे चढ़ा। बिना प्रवेश व परीक्षा डिग्रियां बांटने वाले इस गिरोह का नेटवर्क नौ राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों में फैला था। एसआईटी की गिरफ्त में आए आरोपी वीके को गुरुवार जेल भेजा गया। आरोपी ने कबूल किया कि करीब डेढ़ साल पहले वह गिरोह के सरगना के संपर्क में आया था। सरगना व उसके बीच 7.53 लाख का ट्रांजेक्शन भी मिला है।

मूलरूप से बिहार के बक्सर रामपुर गांव निवासी विनीत राय उर्फ वीके मौजूदा समय में ग्रेटर नोएडा में रह रहा था। गुरुवार उसे जूही गौशाला के पास से एसआईटी ने दबोचा। वीके को गिरोह के सरगना शैलेंद्र कुमार ओझा की कॉल डिटेल के आधार पर पकड़ा गया। बता दें कि 18 फरवरी को किदवईनगर पुलिस ने जूही गोशाला चौराहा के पास शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के कार्यालय में छापा मारकर फर्जी डिग्री बनाने वाले बड़े गिरोह का खुलासा किया था। 

डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि छापेमारी में नौ राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों व यूपी माध्यमिक शिक्षा परिषद समेत एक हजार से अधिक फर्जी मार्कशीट व डिग्रियां बरामद हुईं थीं। जिसमें बीटेक, एमटेक, बीफार्मा, डीफार्मा और एलएलबी समेत कई डिग्रियां शामिल थीं। पुलिस ने मौके से सरगना शैलेंद्र कुमार समेत नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र व अश्वनी कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। एसआईटी की जांच के दौरान सामने आया कि वीके सरगना शैलेंद्र के लिए बिचौलिए का काम करता था। 

पूछताछ में उसने बताया कि उसने सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी से बीसीए करने के बाद ग्रेटर नोएडा स्थित एक्यूरेट ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस से परास्नातक की डिग्री ली थी। इसके बाद वह विभिन्न निजी विवि के लिए मार्केटिंग का काम करने लगा था। विनीत ने बताया कि उसने जयपुर की निम्स व नोएडा की महार्षि यूनिवर्सिटी के लिए भी प्रवेश से जुड़ा काम करता था। फरवरी 2023 में उसने मोनाड यूनिवर्सिटी ज्वाइन की। इसी दौरान उसकी मुलाकात शैलेंद्र से हुई थी। शैलेंद्र ने खुद को कंसल्टेंसी संचालक बताते हुए कमीशन पर प्रवेश कराने की बात कही थी। जिसके बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। 

एलएलबी में प्रवेश तक ही सीमित रहा 

पुलिस पूछताछ में आरोपी वीके ने बताया कि अब तक वह 7-8 छात्रों को एलएलबी में प्रवेश दिलाकर डिग्री उपलब्ध करा चुका है। बीए की डिग्री के बारे में उसने जानकारी से मना किया। कहा कि उसका काम केवल एलएलबी में प्रवेश कराने तक ही था। उससे यह भी पता चला कि शैलेंद्र के संपर्क मोनाड यूनिवर्सिटी में पहले प्लानिंग मैनेजर रहे रोहित शर्मा भी संपर्क में थे। जिसने बाद में नौकरी छोड़ दी थी। अब एसआईटी रोहित की तलाश में है। 

2012 से सक्रिय है जालसाज गिरोह

डीसीपी साउथ ने बताया कि जांच में सामने आया कि गिरोह 2012 से फर्जी डिग्री, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और अंकपत्र तैयार कर लोगों को उपलब्ध करा रहा था। आरोपी विश्वविद्यालयों के स्टाफ के बीच अपना मेलजोल बढ़ाकर फर्जी डिग्री को अधिकांश जगहों पर सत्यापित करा लेते थे। हालांकि पुलिस सत्यापन के दौरान वह खुद ही डिग्री को फर्जी बता देते थे। जिससे मामला पकड़ा न जाए। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।

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