लखनऊ : बैंक मित्र ने मोबाइल तोड़ साक्ष्य मिटाए, रिकवरी को फोरेंसिक लैब भेजा
लखनऊ, अमृत विचार : शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय परिसर स्थित बैंक आफ बड़ौदा के कर्मचारियों के साथ मिलकर करोड़ों की हेराफेरी की गई। इस मामले में बैंक मित्र शिवा राव ने साक्ष्य मिटाने के लिए अपना मोबाइल तोड़ दिया। पारा पुलिस ने मोबाइल जब्त कर फाेरेंसिक लैब जांच के लिए भेजा है। साथ ही वर्ष 2020 से अब तक के चार बैंक मैनेजरों से पूछताछ की तैयारी कर रही है। उनको नोटिस भेजा गया है। पुलिस ने रविवार को बैंक मित्र व उसके सहयोगी को गिरफ्तार किया था। दोनों को सोमवार को कोर्ट में पेश किया। जहां से जेल भेज दिया गया है।
इंस्पेक्टर सुरेश सिंह ने बताया कि शिवा और दिलीप के पास से 2,38,000 रुपये, फर्जी प्रपत्र और बैंक के कार्यों से संबंधित दस्तावेज बरामद किए गए हैं। शिवा के पास जो मोबाइल मिला है। वह टूट चुका है और ऑन नहीं हो रहा है। पूछताछ में बताया कि साक्ष्य मिटाने के लिए मोबाइल तोड़ा था। पुलिस ने मोबाइल को कब्जे में लेकर डाटा रिकवरी के लिए फाेरेंसिक लैब भेजा है। दिलीप के मोबाइल से रकम को दूसरों के खाते में ट्रांसफर किए जाने के साक्ष्य मिले हैं। इंस्पेक्टर ने बताया कि वर्ष 2020 से बैंक में अब तक चार बैंक मैनेजर तैनात रहे उनसे पूछताछ की जाएगी। बैंक ने अभी तक कर्मचारियों का पूरा डाटा उपलब्ध नहीं किया है। मंगलवार तक का समय है। अगर डाटा नहीं मिला तो दोबारा नोटिस जारी की जाएगी। पता लगाया जा रहा है कि रकम ठगने के बाद किन-किन खातों में स्थानांतरित की गई है। ताकि गिरोह में शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी की जा सके। अब तक की जांच में करोड़ों रुपये की ठगी की पुष्टि हो चुकी है।
सिक्योरिटी गार्ड दिलीप ने शिवा से दोस्ती के बाद शुरू किया फर्जीवाड़ा
पुलिस के मुताबिक राजाजीपुरम सरीपुरा निवासी शिवा राव शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय परिसर में स्थित बैंक आफ बड़ौदा में दस वर्षों से बैंक मित्र था। वहीं, माल के थावर हालपता दुबग्गा के सैंथा रोड दौलतखेड़ा निवासी दिलीप कुमार 2018 में बैंक परिसर में बने एटीएम बूथ का सिक्योरिटी गार्ड था। जिसे 2019 में हटा दिया गया था। तभी से दिलीप बैंक में चाय पिलाने और बैंक खोलने व बंद करने का काम करने लगा था। शिवा के साथ बैंक के अंदर ही ग्राहकों से लेनदेन और अन्य काम करने लगा था। वर्ष 2020 से शिवा ने दिलीप के साथ मिलकर ग्राहकों से फर्जी एफडी थमाकर ठगी करना शुरू कर दिया था। ग्राहकों को फर्जी कागजात तैयार करने में दिलीप मदद करता था।
