कागजों तक सीमित रह गई सरकारी घोषणा, कैशलेस चिकित्सा सुविधा का शिक्षक कर रहे महीनों से इंतजार

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Published By Muskan Dixit
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शिक्षकों में आक्रोश, कहा अधिकारियों की लापरवाही से शिक्षक परेशान

लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश सरकार द्वारा प्राथमिक शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा किए चार माह बीत चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर यह योजना अब तक लागू नहीं हो सकी है। इससे प्राथमिक शिक्षक निराशा और नाराज़गी महसूस कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि योजना की घोषणा के समय इसे शीघ्र लागू करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन आज तक उन्हें इसका कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल पाया है। इस योजना के तहत शिक्षकों और उनके आश्रितों को सूचीबद्ध निजी व सरकारी अस्पतालों में बिना नकद भुगतान के इलाज की सुविधा दी जानी है। जिससे गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में शिक्षकों को आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े। हालांकि अब तक न तो अधिकांश शिक्षकों को कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं और न ही अस्पतालों की स्पष्ट सूची जारी की गई है।

शिक्षक संगठनों का आरोप है कि विभागीय स्तर पर लापरवाही के कारण योजना फाइलों तक सीमित रह गई है। शिक्षकों ने जब अस्पतालों से संपर्क किया तो उन्हें बताया गया कि कैशलेस सुविधा से संबंधित कोई स्पष्ट निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने मांग की है कि सरकार तत्काल योजना को पूरी तरह लागू करे और इसकी प्रगति की नियमित समीक्षा करे। जबकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी प्रक्रियाएं और अस्पतालों का पैनल तैयार करने का कार्य चल रहा है और जल्द ही योजना को धरातल पर उतारा जाएगा।

शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री ने की थी घोषणा

शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक, रसोइयों के लिए घोषणा की गई थी। नए साल में कैशलेस चिकित्सा का लाभ सभी शिक्षकों को मिल जाए, इसके लिए भरोसा दिया गया था।

क्या बोला शिक्षक संघ

कैशलेस चिकित्सा के लिए ज्ञापन कार्यक्रम व आंदोलन किए गए, जिसके बाद मुख्यमंत्री द्वारा इसकी घोषणा की गई। शिक्षकों के संघर्ष व स्वास्थ्य की दृष्टिगत की गई घोषणा से शिक्षक काफी खुश थे, लेकिन उच्च अधिकारियों के उदासीन रवैए के चलते लाभ न मिलते देख शिक्षक निराश हो रहे हैं।

-सुशील कुमार पाण्डेय, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ

सभी तरह के कार्य करने के लिए शिक्षकों को अग्रिम श्रेणी में रखकर कार्य करवाए जाते है। परंतु जब शिक्षकों को सुविधा देने के बात होती है, तो शिक्षकों को अंतिम श्रेणी में भी नहीं रखा जाता है।

-मनोज कुमार मौर्य, जिला कोषाध्यक्ष, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, लखनऊ

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