यूपी में किसान सशक्तिकरण बना राष्ट्रीय मॉडल, योगी मॉडल से खेती-किसानी में आई क्रांति

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Published By Muskan Dixit
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संकट से समृद्धि तक अन्नदाता का सफर, पौने नौ वर्ष में कृषि बनी अर्थव्यवस्था की रीढ़

लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश के किसानों ने जब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व पर भरोसा किया तो खेती-किसानी की तस्वीर ही बदल गई। वर्ष 2017 से पहले खाद्यान्न संकट, कालाबाजारी, बकाया भुगतान और अव्यवस्था से जूझ रहा प्रदेश आज कृषि उत्पादन और किसान सशक्तिकरण का राष्ट्रीय मॉडल बन चुका है। योगी मॉडल का ही परिणाम है कि देश की कुल कृषि भूमि का मात्र 10 प्रतिशत हिस्सा रखने वाला प्रदेश अब राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन में करीब 21 प्रतिशत का योगदान दे रहा है।

योगी सरकार से पहले जहां कृषि क्षेत्र की विकास दर सिंगल डिजिट में सिमटी रहती थी, वहीं बीते तीन वर्षों में कृषि व संबद्ध क्षेत्रों की विकास दर 14 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है। ‘खेत से खुशहाली’ की यह यात्रा केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि पारदर्शी व्यवस्था, समयबद्ध निर्णय और किसान-केंद्रित सोच के जरिए जमीन पर उतरी।

वोटबैंक नहीं, अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना किसान

2017 में सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कर दिया कि किसान सिर्फ वोटबैंक नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसी सोच के तहत ₹36 हजार करोड़ का ऐतिहासिक कर्ज माफ किया गया। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पारदर्शी फसल खरीद, समयबद्ध भुगतान और सशक्त निगरानी व्यवस्था ने किसानों का भरोसा लौटाया।

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार- नहरों के पुनर्जीवन, नलकूपों की संख्या में वृद्धि और रियायती/मुफ्त सिंचाई योजनाओं ने उत्पादन क्षमता को नई ऊंचाई दी। सूखा और जल संकट झेलने वाले क्षेत्रों में भी खेती फिर से सांस लेने लगी।

सम्मान, तकनीक और निवेश से बदली खेती

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त तक उत्तर प्रदेश के किसानों को ₹94,668.58 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। दो करोड़ से अधिक किसान किसान पाठशालाओं के जरिए आधुनिक कृषि तकनीक से जुड़े। ‘लैब टू लैंड’ अभियान के तहत 14,170 गांवों में 23.30 लाख किसानों से वैज्ञानिकों का सीधा संवाद हुआ। सहकारिता क्षेत्र में ब्याज दर घटाकर छह प्रतिशत करने, सीड पार्क, टिश्यू कल्चर लैब और बासमती प्रशिक्षण केंद्र जैसी पहलों ने खेती को तकनीक-समर्थ और बाजार-उन्मुख बनाया।

गन्ने ने भरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा

योगी सरकार ने गन्ना किसानों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लिए। पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में ₹30 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई। अगेती प्रजाति का मूल्य ₹400 और सामान्य प्रजाति का ₹390 प्रति क्विंटल तय हुआ। इससे किसानों को लगभग ₹3,000 करोड़ का अतिरिक्त लाभ होगा। 2017 से अब तक ₹2.96 लाख करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड गन्ना भुगतान किया जा चुका है, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकी है।

योगी मॉडल की बड़ी उपलब्धियां

• राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन में यूपी का योगदान 21%

• कृषि विकास दर 14% से अधिक

• ₹36 हजार करोड़ का कर्ज माफ

• पीएम किसान सम्मान निधि में अग्रणी राज्य

• ₹2.96 लाख करोड़ का रिकॉर्ड गन्ना भुगतान

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