चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने दिया इस्तीफा : फैसले पर ममता बनर्जी ने जताई हैरानी, बताया केंद्र की साजिश
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने गुरुवार को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच इस इस्तीफे ने राजनीतिक हलकों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक बोस इस समय नयी दिल्ली में हैं और उन्होंने राष्ट्रपति भवन में अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उनके इस अचानक फैसले के पीछे के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बोस के इस्तीफे पर हैरानी जताते हुए कहा कि उनकी जगह आर. एन. रवि को राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, "केंद्रीय गृह मंत्री ने अभी मुझे सूचित किया है कि आर. एन. रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया जा रहा है।" राजभवन के सूत्रों ने बताया कि श्री बोस ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति भवन भेज दिया है और उसे औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है। राज्यपाल ने हालांकि खुद अभी तक पद छोड़ने के अपने फैसले पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है।
बोस ने 17 नवंबर, 2022 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला था। उनका कार्यकाल नवंबर 2027 तक जारी रहने वाला था, लेकिन उन्होंने अपना पूर्ण कार्यकाल समाप्त होने से लगभग 20 महीने पहले ही पद छोड़ दिया। कार्यभार संभालने के बाद से ही बोस राज्य से जुड़े कई मुद्दों पर अक्सर खुलकर बोलते रहे थे। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार की कई नीतियों की आलोचना की थी और उनके कार्यकाल के दौरान राजभवन और राज्य प्रशासन के बीच कई बार टकराव देखा गया। कई मौकों पर ये मतभेद खुले संघर्ष में बदल गए थे।
मुख्यमंत्री ने लिखा, "पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री सी. वी. आनंद बोस के अचानक इस्तीफे की खबर से मैं स्तब्ध और बेहद चिंतित हूँ। उनके इस्तीफे के पीछे के कारण मुझे इस समय पता नहीं हैं।" ममता बनर्जी ने कहा, "वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए, मुझे आश्चर्य नहीं होगा यदि राज्यपाल पर आगामी विधानसभा चुनावों की पूर्व संध्या पर कुछ राजनीतिक हितों को साधने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री (अमित शाह) की ओर से दबाव डाला गया हो।"
मुख्यमंत्री ने यह भी लिखा, "केंद्रीय गृह मंत्री ने अभी मुझे सूचित किया कि आर. एन. रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया जा रहा है। उन्होंने इस संबंध में स्थापित परंपरा के अनुसार मुझसे कभी परामर्श नहीं किया। ऐसी कार्रवाइयां भारत के संविधान की भावना को कमजोर करती हैं और हमारे संघीय ढांचे की नींव पर प्रहार करती हैं।" ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र को सहकारी संघवाद के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए और ऐसे एकतरफा फैसले लेने से बचना चाहिए जो लोकतांत्रिक परंपराओं और राज्यों की गरिमा को नुकसान पहुँचाते हैं।
