500 किमी की ऐतिहासिक पदयात्रा! बुंदेलखंड की 'जल सहेलियां' 29 जनवरी से निकालेंगी यमुना बचाओ अभियान
दिल्ली तक पहुंचाएंगी अविरल-निर्मल नदी का संदेश
लखनऊः यमुना नदी के संरक्षण, अविरलता और निर्मलता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से बुंदेलखंड की चर्चित 'जल सहेली' संगठन की ओर से लगभग 500 किलोमीटर से अधिक लंबी 'यमुना यात्रा' की शुरुआत 29 जनवरी 2026 को पंचनद (जालौन-इटावा) से की जाएगी। यह यात्रा एक माह तक चलेगी और दिल्ली तक पहुंचेगी। इसे दुनिया की सबसे लंबी महिलाओं की यमुना यात्रा बताया जा रहा है। यात्रा के शुभारंभ अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
बुंदेलखंड क्षेत्र में पिछले करीब एक दशक से जल संरक्षण अभियान में सक्रिय जल सहेलियां अब तक क्षेत्र की छह सूखी नदियों को पुनर्जीवित, तथा हजारों तालाबों को बचाने और संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी हैं।
जल संरक्षण के क्षेत्र में उनके कार्यों की सराहना प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति स्तर तक हो चुकी है, वहीं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उनके प्रयासों का उल्लेख किया गया है। जल सहेलियों की इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य यमुना नदी के प्रदूषण को लेकर जागरूकता बढ़ाना, नदी के प्रति जनभागीदारी सुनिश्चित करना और स्वच्छता, संरक्षण व पुनर्जीवन के संदेश को समाज तक पहुंचाना है।
संगठन के अनुसार, यमुना आज गंभीर प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है, जबकि इसका धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व अत्यंत बड़ा है। जल सहेली संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पा देवी ने बताया कि यह पूरी मुहिम हजारों महिलाओं के सामूहिक सहयोग से संचालित हो रही है। वर्तमान में संगठन से 3000 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं, जो बिना किसी सरकारी या गैर-सरकारी सहायता के स्वयं के श्रम, योगदान और समर्पण से जल संरक्षण कार्य कर रही हैं। यह यात्रा जालौन से प्रारंभ होकर इटावा, आगरा, मथुरा और हरियाणा होते हुए फरीदाबाद, पलवल से गुजरते हुए दिल्ली में समाप्त होगी। इस दौरान हजारों महिलाएं पैदल चलकर नदी किनारे बसे लोगों से संवाद, श्रवदान, वृक्षारोपण तथा जन-जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से यह संदेश देंगी कि यमुना हम सबकी है और इसे बचाना हम सभी का दायित्व है।
जल सहेली फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. संजय सिंह ने इसे पूर्णतः पर्यावरणीय चेतना की यात्रा बताते हुए कहा कि इस अभियान का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को जोड़ते हुए यमुना संरक्षण के लिए एक बड़ा जन आंदोलन खड़ा करना है।
