Atal Pension Yojana: मोदी मंत्रिमंडल का बड़ा फैसला, 2031 तक जारी रहेगी अटल पेंशन योजना, अगले 5 साल तक मिलेगा फायदा 

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Published By Anjali Singh
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दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सरकार की प्रमुख अटल पेंशन योजना (एपीवाई) को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने को बुधवार को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही प्रचार, विकासात्मक गतिविधियों और 'गैप फंडिंग' के लिए वित्तीय सहायता के विस्तार को भी स्वीकृति दी गई है। वित्तीय कमी की पूर्ति को 'गैप फंडिंग' कहते हैं। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, असंगठित क्षेत्र के कामगारों के बीच पहुंच बढ़ाने के लिए जागरूकता एवं क्षमता निर्माण जैसी गतिविधियों को सरकारी समर्थन मिलता रहेगा। अटल पेंशन योजना की शुरुआत नौ मई 2015 को की गई थी। 

जिसका मकसद असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में आय सुरक्षा प्रदान करना है। विज्ञप्ति के अनुसार, 19 जनवरी 2026 तक एपीवाई के तहत 8.66 करोड़ से अधिक सदस्य पंजीकृत हो चुके हैं। योजना के तहत योगदान के आधार पर 60 वर्ष की आयु के बाद 1,000 रुपये से 5,000 रुपये प्रति माह तक की न्यूनतम पेंशन की गारंटी का प्रावधान है। 

MSME विकास बैंक को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता देगी सरकार 

सरकार ने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता देने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। सरकार ने एक वक्तव्य जारी कर कहा है कि 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी वित्तीय सेवा विभाग द्वारा सिडबी में तीन चरणों में निवेश की जाएगी। 

इसमें वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश 31.03.2025 के बुक वैल्यू पर प्रति शेयर 568.65 रुपये किया जाएगा। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 में क्रमशः 1,000 करोड़ रुपये, 1,000 करोड़ रुपये की राशि संबंधित पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष की 31 मार्च की बुक वैल्यू पर निवेश की जाएगी। इससे 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी निवेश के बाद वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले लघु इकाइयों (एमएसएमई) की संख्या वित्तीय वर्ष 2025 के अंत में 76.26 लाख से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2028 के अंत तक 102 लाख (अर्थात लगभग 25.74 लाख नए एमएसएमई लाभार्थी जोड़े जाएंगे) होने की उम्मीद है। 

एमएसएमई मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट से उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों (30.09.2025 तक) के अनुसार, 6.90 करोड़ एमएसएमई (अर्थात प्रति एमएसएमई औसतन 4.37 व्यक्तियों का रोजगार सृजन) द्वारा कुल 30.16 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान किया गया है। इस औसत को ध्यान में रखते हुए वित्तीय वर्ष 2027-28 के अंत तक अनुमानित 25.74 लाख नए एमएसएमई लाभार्थियों के जुड़ने से लगभग 1.12 करोड़ नए रोजगार के सृजन का अनुमान है। 

उल्लेखनीय है कि निर्देशित ऋण पर विशेष ध्यान तथा आगामी पांच वर्षों में पोर्टफोलियो में अपेक्षित वृद्धि के कारण, सिडबी की बैलेंस शीट पर जोखिम में फंसे कर्ज में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। इस वृद्धि के चलते इस कर्ज के अनुपात (सीआरएआर) के समान स्तर को बनाए रखने के लिए अधिक पूंजी की आवश्यकता होगी। 

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