14 साल की सजा पूरी कर चुके कैदियों का हाईकोर्ट ने मांगा ब्यौरा, लखनऊ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया आदेश
लखनऊ, अमृत विचार: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह प्रदेश की विभिन्न जेलों में 14 वर्ष या उससे अधिक समय से निरुद्ध कैदियों का पूरा ब्यौरा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे। साथ ही ऐसे कैदियों द्वारा कानून के तहत सजा में छूट (रिमिशन) के लिए दाखिल आवेदनों की जानकारी भी मांगी गई है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि 14 वर्ष की सजा पूरी करने वाले कैदियों की रिमिशन याचिकाओं पर सक्षम प्राधिकारी कितने मामलों में विचार कर रहे हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि क्या ऐसे कैदियों को उनके रिमिशन के अधिकार की जानकारी दी जाती है? उनके आचरण व जेल में गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया स्वतः शुरू की जाती है या नहीं? यह आदेश वर्ष 2020 में बीके सिंह परमार द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर पारित किया गया है।
याचिका में कहा गया है कि कानून के अनुसार प्रत्येक कैदी को 14 वर्ष की सजा पूरी होने के बाद अच्छे आचरण के आधार पर समयपूर्व रिहाई (रिमिशन) पर विचार किए जाने का अधिकार है और जेल प्रशासन का यह वैधानिक दायित्व है कि वह प्रत्येक पात्र कैदी का मामला समय पर आगे बढ़ाए। याची का आरोप है कि जेल प्रशासन इस दायित्व का समुचित पालन नहीं कर रहा है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि यह याचिका महत्वपूर्ण सार्वजनिक हित के प्रश्न उठाती है, क्योंकि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 433 व 433-ए, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 474, उत्तर प्रदेश कैदी परिवीक्षा पर रिहाई अधिनियम, 1938 तथा उसके नियमों के तहत कैदियों के मामलों पर समयबद्ध विचार आवश्यक है। हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव, गृह को निर्देश दिया है कि वे स्वयं शपथ पत्र दाखिल कर सभी आवश्यक विवरण रिकॉर्ड पर रखें। मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को निर्धारित की गई है।
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