मकर संक्रांति पर बांदा में तुलादान की प्रथा, सदियों से चली आ रही प्राचीन परंपरा, जानें क्या है तराजू दान 

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
On

बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में मकर संक्रांति के पर्व पर गुरुवार को तुलादान का कार्यक्रम तराजू की पूजा आरती के बाद विधिवत संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के अंतर्गत मकर संक्रांति के पर्व पर जोशी समुदाय के लोग बड़े-बड़े तराजू लेकर घर-घर पहुंच कर तुला दान कार्यक्रम संपन्न कराते हैं। 

मान्यताओं के अनुसार तुलादान हो जाने से ग्रह नक्षत्र 1 वर्ष तक शांत रहते है। जिसमें पुरुष वर्ग के तौल के बराबर गेहूं, गुड़, चावल अन्य खाद्य सामग्री जोशी को दान स्वरूप प्रदान करने से परिवार के सभी लोग दोष , रोग, विपत्ति से मुक्त होकर सुखमय शांतिमय जीवन एक वर्ष तक स्वस्थ्य एवं प्रसन्नचित रहकर व्यतीत करते हैं और परिवार प्रगति की ओर अग्रसर रहता है। 

प्राचीन परम्परा के अनुसार यह तुलादान कार्यक्रम जिले के अतर्रा तहसील क्षेत्र में अत्यधिक प्रचलित है। मकर संक्रांति के अवसर पर आज सुबह से ही जोशी समुदाय के लोग घर-घर बड़े-बड़े तराजू लेकर पहुंचे जहां तराजू को खड़ा कर उसकी पूजा अर्चना कर उसकी आरती कर हवन आदि किया गया। 

विधिवत पूजा के बाद परिवार के पुरुष वर्ग के व्यक्तियों को तराजू के एक पल्ले में बैठाकर दूसरे पल्ले में चावल ,गेहूं , गुड़ या अन्य खाद्य सामग्री रखकर मानव के बराबर तौला गया और विविध मंत्रोच्चार के बाद व्यक्ति के बराबर तौली गई सामग्री को दान स्वरूप जोशी को प्रदान की गई। कार्यक्रम के अंत में जोशी का टीका कर उसे इच्छा अनुसार बिदाई की नगद धनराशि देकर ससम्मान घर से विदा किया गया। 

ये भी पढ़ें : 
यूपी में बनेंगे 6 नॉर्थ-साउथ हाईवे कॉरिडोर, योगी सरकार ने दी मंजूरी, अब मिनटों में सफर होगा तय   

संबंधित समाचार