बदरीनाथ धाम में अनोखी परंपरा, आज भी महाराजा के दरबार में निश्चित होती है कपाट खुलने की तिथि घोषित 

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Published By Anjali Singh
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देहरादून। उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित भगवान विष्णु के बदरी स्वरूप वाले पौराणिक धाम के कपाट खोले जाने की तिथि टिहरी गढ़वाल के महाराजा मनुजेंद्र शाह की जन्मपत्री के अनुसार घोषित किए जाने की परम्परा अब भी बरकरार है। 

शुक्रवार को टिहरी गढ़वाल के नरेंद्रनगर स्थित राज महल में सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए महाराजा मनुजेंद्र शाह की जन्मपत्री और पंचांग के सूक्ष्म विचार के बाद बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि औपचारिक रूप से घोषित की गई। 

परंपरानुसार ब्रह्म मुहूर्त में 23 अप्रैल को सुबह सवा छह बजे धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ विधि-विधान के साथ खोले जाएंगे। उल्लेखनीय है कि टिहरी राजपरिवार की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसके अनुसार सबसे पहले बद्रीनाथ धाम के कपाट की तिथि महाराजा की कुंडली के आधार पर तय की जाती है। 

इसके उपरांत केदार नाथ धाम, गंगोत्री धाम और यमुनोत्री इन चारों धामों के कपाट खोलने की तिथियाँ अलग-अलग समय पर परंपरानुसार निर्धारित की जाती हैं। चारधाम परंपरा में बदरीनाथ धाम को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहीं से संपूर्ण यात्रा का आध्यात्मिक संकेत मिलता है। आज इस ऐतिहासिक अवसर पर बदरीनाथ केदार नाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी राजमहल नरेंद्र नगर में परंपरा के इस पावन अनुष्ठान में सम्मिलित हुए। 

इस अवसर पर उन्होंने राज्य और देशभर के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएँ देते हुए बदरीनाथ धाम आने का सादर निमंत्रण दिया। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस वर्ष से ऋषिकेश में बस अड्डे के समीप पर्यटन विभाग के विशाल परिसर में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का कार्यालय संचालित होगा, क्योंकि यहीं से तीर्थयात्रियों को लेकर विभिन्न गंतव्यों के लिए बसें प्रस्थान करती हैं, जिससे यात्रियों को सुविधा और समन्वय दोनों में लाभ मिलेगा। 

कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष द्विवेदी ने टिहरी राजपरिवार के सदस्यों महाराजा मनुजेंद्र शाह , भवानी प्रताप राव, कीर्ति प्रताप, कुल पुरोहितों तथा बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारियों (रावल) से भेंट कर उन्हें आगामी बदरीनाथ-केदारनाथ-गंगोत्री-यमुनोत्री यात्रा की तैयारियों की जानकारी दी और सभी को बधाई दी। 

इस प्रकार, आस्था, परंपरा और आधुनिक व्यवस्थाओं के समन्वय के साथ चारधाम यात्रा 2026 की औपचारिक शुरुआत की घोषणा हुई, जो देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक निरंतरता का जीवंत प्रमाण है। 

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