सिल्वर के बढ़ते दामों के बीच जानिए कानपुर क्यों बढ़ी चांदी के सिक्कों की डिमांड
कानपुर, अमृत विचार। चांदी के दामों में उछाल के बीच बाजार का रुझान लगातार बदल रहे है। इन बदलाव में चांदी को मांगलिक कार्यों में खरीदारी के भ्रम को तोड़ दिया है। बाजार के नए रुझान में नौकरीपेशा चांदी के सिक्कों के जरिए अपनी बचत व निवेश बढ़ा रहा है। कारोबारियों की माने तो महीने के शुरुआती हफ्तों में चांदी के सिक्को की अधिक मांग इसकी बड़ी वजह है।
शहर में चांदी के दामों में कम पूंजी वाले भी अब छोटा निवेश करने करने लगे हैं। यह युवा खासतौर पर वेतन आने के बाद बचे हुए रुपयों से सराफा बाजार में चांदी के सिक्कों को अपनी पहली पसंद मान रहे हैं। कारोबारियों ने बताया कि चांदी के दाम दो लाख रुपये से अधिक होने के बाद से यह रुझान बाजार में अधिक दिख रहा है।
30 से 35 उम्र के युवा हर महीने आकर एक या दो चांदी के सिक्के खरीद रहे हैं। इनमें कई युवा ऐसे भी हैं जो तीन से चार महीनों में हर महीने बाजार का रुख कर रहे हैं। कारोबारियों ने यह भी बताया कि उनके कई ऐसे खरीदार हैं जो निवेश के विभिन्न माध्यमों से हटकर अब चांदी के सिक्के पर निवेश कर रहे हैं।
पूरे मामले पर कानपुर महानगर बुलियन एंड सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष पं. आशू शर्मा ने बताया कि चांदी खरीद का रुझान अब युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है। जिनके पास अधिक रुपये नहीं है वह भी चांदी की ओर से रुख कर रहे हैं। युवा पीढ़ी भी इनमें तेजी से बाजार में खरीदारी के लिए जुट रहे हैं। छोटी पूंजी वाले सिक्कों को अधिक पसंद कर रहे हैं।
बाजार में बढ़ जाती मांग
चांदी के सिक्के सबसे अधिक सहालग, धनतेस व अक्षय तृतीया में खरीदे जाते हैं। इनके अलावा यदि आम दिनों की बात की जाए तो इनका कारोबार औसत होता है। सराफा कारोबारियों ने बताया कि यदि प्रति माह औसत निकाला जाए तो पूरे शहर में लगभग 2 हजार सिक्के बिकते हैं, दाम बढ़ने के बाद अब हर महीने की शुरुआत में इनकी संख्या लगभग 2 हजार से 25 सौ तक पहुंच जाती है। खरीदारी करने वालों में अधिकतर युवा वर्ग ही शामिल हैं। चांदी के दाम बढ़ने के पहले बाजार में औसत बिक्री अक्सर आम दिनों मे न के बाराबर होती थी।
नए सिक्के पर जोर
वेतन हासिल करने वाले ऐसे निवेशक जिनकी पूंजी कम है वे नए सिक्कों की ओर से अधिक रुझान दिखा रहे हैं। इसकी वजह नए सिक्कों में पांच ग्राम तक के सिक्के तक की बाजार में उपलब्धता है। जबकि बाजार में पुराने सिक्के की उपलब्धता कम होने से इनकी खरीद कम हो रही है। जबकि सहालग व पर्व के दौरान पुराने सिक्के की मांग अधिक मानी जाती है।
