किसान मेला-2026 : 25 राज्यों के 5 हजार किसान प्रशिक्षण में ले रहे हैं हिस्सा, लखनऊ के सीमैप में लगा किसानों का मेला
लखनऊ, अमृत विचार: श्वेत क्रांति के बाद दुग्ध उत्पादन में 28 सालों से हम दुनिया में नंबर एक हैं। अन्न उत्पादन में भी हमें प्रथम स्थान हासिल करना है। जब देश की आबादी 2050 में सर्वाधिक होगी तब भी सबका पेट भरना होगा। इसके लिए किसानों को विज्ञान और तकनीक का इस्तेमाल करना होगा। आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल के निदेशक और वैज्ञानिक डॉ. धीर सिंह ने कहा।
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सीएसआईआर-सीमैप में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय किसान मेला में देश भर से आए किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कर्ण गाय का उदाहरण दिया जिसे वैज्ञानिकों ने विकसित किया है और 46 लीटर दूध देती है। वैज्ञानिकों ने कहा कि कोविड जैसी महामारी हो, या अत्यंत खराब मौसम, सूखा, बाढ़ या पाला अन्न उत्पादन में हमें प्रथम स्थान पर रहना है।
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उत्तर प्रदेश और देश के विभिन्न राज्यों से आये हुए किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), उद्यमियों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और उद्योग हितधारकों ने मेले में हिस्सा लिया। मेले में किसानों को उन्नत तकनीकों से जोड़ने, औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा देने और किसानों, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच संबंधों को प्रगाढ़ किया जाएगा। सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार ने औषधीय और सुगंधित पौधों के पारिस्थितिकी तंत्र में आजीविका वृद्धि और व्यवसाय पहल पर विस्तार से बताया।
औषधीय व सुगंधित पौधों के 100 व्यसायियों पर पुस्तक
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निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने किसानों को औषधीय और सुगंधित फसलों को तेजी से अपनाने और वैज्ञानिक तकनीकों के प्रयोग के बारे में बताया। उन्होंने पुदीना की खेती, इसके उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और संपूर्ण मूल्य श्रृंखला विकास को बढ़ावा देने के बारे में बताया। सीएसआईआर-सीमैप एक कॉफी टेबल बुक प्रकाशित करने जा रहा है जिसमें 100 से अधिक सफल उद्यमी शामिल हैं जो पूरे औषधीय और सुगंधित पौधों के व्यवसाय पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में योगदान दे रहे हैं।
राममनोहर लोहिया अस्पताल करेगा दवाओं का परीक्षण
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मेले में सीएसआईआर-सीमैप और डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के बीच समझौता किया गया। इस समझौते से संस्थान द्वारा विकसित औषधियों का चिकित्सकीय परीक्षण अस्पताल करेगा। साथ ही पूर्व नैदानिक अध्ययन, क्रियाविधि अनुसंधान, शैक्षणिक आदान-प्रदान आदि भी किया जाएगा।
आईसीएआर-एनडीआरआई से भी हुआ समझौता
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जुगाली करने वाले पशुओं के लिए सूखी चारे के स्रोत के रूप में सुगंधित पौधों के आसवन अवशेषों के उपयोग के लिए अनुसंधान और विकास पर केंद्रित समझौता आईसीएआर-एनडीआरआई करनाल के साथ किया गया। इस अवसर पर भोपाल के सीएसआईआर-उन्नत सामग्री और प्रक्रिया अनुसंधान संस्थान डॉ. थल्लाडा भास्कर भी मौजूद रहे।
