यूपी : घर में नमाज पढ़ने से रोकने का मामला, बरेली के डीएम और एसएसपी हाईकोर्ट में तलब
-अदालत ने घर के मालिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दो सुरक्षागार्ड उपलब्ध कराने का दिया निर्देश
अमृत विचार : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने घर के अंदर नमाज पढ़ने से रोके जाने के एक मामले में बरेली के डीएम और एसएसपी को व्यक्तिगत रूप से 23 मार्च को उपस्थित होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगर दोनों अधिकार पेश नहीं होते हैं तो उनके विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी किया जाएगा। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें दो सुरक्षागार्ड उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए हैं।
घर में नमाज से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने दिया है। बुधवार को हसीन खान ने कोर्ट के सामने अपना बयान दर्ज कराया-जोकि उस घर के मालिक हैं, जहां नमाज पढ़ने को लेकर ये कार्रवाई सामने आई थी।
हसीन खान ने कोर्ट में कहा कि 16 जनवरी 2026 को वह अपने परिवार के साथ घर में नमाज अदा कर रहे थे। उसी वक्त पुलिस उन्हें घर से उठा ले गई और उनका चालान कर दिया गया। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद हसीन खान का आरोप है कि दबाव बनाने के लिए उन्हें काफी धमकाया गया। ये कहते कि अगर उसने कोर्ट में सच बोला तो उसके घर को बुलडोजर से ढहा दिया जाएगा।
हसीन खान ने कोर्ट में बताया कि वह अनपढ़ हैं। पुलिस जब उन्हें गांव के बाहर लेकर गई थी-तब एक सादे कागज पर अंगूठा भी लगवाया था-उन्हें नहीं बता कि उस कागज पर क्या लिखा था। अदालत ने आरोपों के मद्देनजर हसीन खान की सशस्त्र सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि हसीन खान की सुरक्षा में 24 घंटे दो सशस्त्र गार्ड रहेंगे। ये सुरक्षा तब तक जारी रहेगी, जब तक कि इस मामले में फैसला नहीं आ जाता। इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने साफतौर पर कहा कि हसीन खान या उनकी प्रॉपर्टीज को कोई भी नुकसान पहुंचता है तो इसके लिए सीधे राज्य सरकार को जिम्मेदार माना जाएगा। कोर्ट ने इसकी प्रति महाधिवक्ता भेजने को कहा, ताकि पीड़ित को आज से ही सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सके।
कोर्ट ने आदेश की प्रति महाधिवक्ता कार्यालय को भेजने का निर्देश देते हुए कहा, ताकि पीड़ित को आज से ही सुरक्षा मुहैया कराई जा सके। ये मामला बरेली के बिशारतगंज थाना क्षेत्र के मुहम्मदगंज गांव का है, जहां घर में नमाज पढ़ने को लेकर पुलिस ने कार्रवाई की थी। ये मामला काफी चर्चा में रहा था।
इस बीच पीड़ित परिवार ने हाईकोर्ट का रुख किया और इसी मामले में कोर्ट ने ये सख़्त रुख अपनाया है। बता मामले में कोर्ट में सुनवाई चल रही है। सनद रहे कि कोर्ट ने अपने एक पूर्व आदेश में कहा था कि, निजी परिसर में प्रार्थना के लिए प्रशासन की अनुमति लेना जरूरी नहीं है।
