दिल्ली अग्निकांड की भयावह तस्वीर, पड़ोसियों ने दीवार और खिड़की तोड़ परिवार को बचाने की कोशिश, मदद में देरी का आरोप 

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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दिल्ली। दिल्ली के पालम इलाके में एक रिहायशी इमारत में आग लगने के बाद पड़ोसियों ने दीवार और खिड़की तोड़कर उसमें फंसे परिवार को बचाने की कोशिश की। चश्मदीदों ने यह जानकारी दी। वहीं, कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि दमकलकर्मियों के खराब उपकरणों के कारण बचाव कार्य में देरी हुई। पालम मेट्रो स्टेशन के पास राम चौक बाजार के नजदीक स्थित बहुमंजिला इमारत बुधवार को लगी आग में पूरी तरह जलकर खाक हो गई। 

इस अग्निकांड में वहां रहने वाले एक ही परिवार के तीन बच्चों समेत नौ सदस्यों की मौत हो गई और तीन अन्य झुलस गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि इमारत की भूतल और पहली मंजिल पर कपड़े और सौंदर्य प्रसाधन की दुकान थी, जबकि भवन स्वामी राजेंद्र कश्यप का परिवार दूसरी और तीसरी मंजिल पर रहता था। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 6:30 बजे आग देखकर एक फूल विक्रेता ने पड़ोसियों को इसकी जानकारी दी। 

पुलिस के मुताबिक आग लगने की सूचना सुबह करीब 7:04 बजे पालम गांव पुलिस थाना को मिली और तुरंत मौके पर टीम पहुंची। स्कूल कैब चालक कमल ने बताया कि स्थानीय लोगों और दमकलकर्मियों समेत करीब 40 लोगों ने दुकान का शटर तोड़कर अंदर फंसे लोगों को बचाने की कोशिश की। आग लगने से शटर पूरी तरह टूट चुका है और बिजली के तार बुरी तरह जल गए हैं। 

कमल ने आरोप लगाया कि मौके पर पहुंचे दमकल कर्मियों को तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, ''जब दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे, तो दबाव प्रणाली में खराबी के कारण वे अपने उपकरणों का इस्तेमाल तत्काल नहीं कर सके। यदि उपकरण समय पर काम कर जाते, तो कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी।'' 

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अतिरिक्त दमकल गाड़ियां पहुंचने से पहले लोगों ने फंसे हुए लोगों तक पहुंचने के लिए बार-बार प्रयास किए। दमकल कार्यालय ने बताया कि इस अभियान के लिए कुल 30 दमकल गाड़ियों की सेवा ली गईं। नजदीक ही मौजूद कपड़ों की दुकान के मालिक रघुनंदन शर्मा ने बताया कि उनके बेटे ने आग लगने की सूचना दी। उन्होंने कहा, ''जब मैं मौके पर पहुंचा, तबतक आग फैल चुकी थी। मैंने अंदर मौजूद लोगों को ऊपर भागने के लिए चिल्लाना शुरू किया। किसी ने चिल्लाकर जवाब दिया कि वे अंदर फंस गए हैं।'' 

शर्मा ने कहा, ''हम बगल वाली इमारत की छत पर गए और वहां से अंदर जाने की कोशिश की, लेकिन धुआं इतना घना था कि हम अंदर नहीं जा सके।'' उन्होंने कहा कि जलती हुई इमारत की सामने वाली खिड़की भी तोड़ने की कोशिश की गई लेकिन धुआं इतना घना था कि उनकी कोशिशें नाकाम रहीं। शर्मा ने बताया, ''जब दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे, तो उनकी हाइड्रोलिक मशीन करीब 45 मिनट तक काम नहीं कर पाई। दूसरी दमकल गाड़ी को पहुंचने में करीब 50 मिनट लगे, और इस देरी के कारण लोगों को खुद ही ऊपर चढ़ने की कोशिश करनी पड़ी।'' 

उन्होंने कहा कि अगर दमकल विभाग की हाइड्रोलिक प्रणाली समय पर काम करती तो इस भयावह त्रासदी को रोका जा सकता था। बचाव अभियान में शामिल पड़ोसियों ने बताया कि धुआं इतना घना था कि किसी को कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था और यह लगातार घना होता जा रहा था। एक पड़ोसी ने बताया कि पुलिस ने भी बगल वाले घर से दीवार का एक हिस्सा तोड़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा, ''हम सबने मिलकर कोशिश की और दीवार का एक हिस्सा तोड़ने में कामयाब रहे, लेकिन धुआं इतना घना था कि अंदर एक कदम भी रखना नामुमकिन था।'' 

अधिकारियों ने कहा कि वे आग लगने के कारणों के साथ-साथ दमकल सेवा में देरी तथा अग्निशमन उपकरणों की खराबी के आरोपों की भी छानबीन कर रहे हैं। पड़ोसियों ने बताया कि इमारत में रखे सामान की वजह से आग और तेजी से फैली। एक पड़ोसी ने बताया, ''पीड़ित परिवार अधोवस्त्र और सौंदर्य प्रसाधन का कारोबार करता था, जो अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ होते हैं, इसलिए आग तेजी से फैली। 

घर सामान से भरा हुआ था और उसमें हवा आने-जाने की कोई व्यवस्था नहीं थी।'' स्थानीय निवासियों ने बताया कि इमरात में संयुक्त परिवार रहता था और सदस्यों में एक बुजुर्ग दंपत्ति, उनके बेटे और बहुएं और कई पोते-पोतियां शामिल थे। उन्होंने बताया कि घटना के समय परिवार के कुछ सदस्य घर से बाहर थे, जिनमें एक बेटा विदेश यात्रा पर था और दूसरे बेटे का परिवार शिमला गया हुआ था। शर्मा ने बताया कि कश्यप की पत्नी शारीरिक रूप से अशक्त थीं और व्हीलचेयर का इस्तेमाल करती थीं, जिससे बचाव कार्य और भी मुश्किल हो गया होगा। 

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