बाराबंकी में पान मसाला-सिगरेट बिक्री में ‘खुली लूट’, एमआरपी से ज्यादा वसूली, जिम्मेदार खामोश

Amrit Vichar Network
Published By Virendra Pandey
On

देवा, बाराबंकी, अमृत विचार : कस्बे में पान मसाला, सिगरेट और तंबाकू उत्पादों की बिक्री इन दिनों उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का सबब बन गई है। जीएसटी बढ़ोतरी का हवाला देकर थोक से लेकर फुटकर विक्रेता तक ग्राहकों से निर्धारित एमआरपी से कहीं अधिक कीमत वसूल रहे हैं। स्थिति यह है कि कुछ उत्पादों पर 25 प्रतिशत तक, तो कुछ पर डेढ़ गुना तक अधिक दाम वसूले जा रहे हैं।

स्थानीय बाजार में रजनीगंधा, कमला पसंद, पान बहार, सिग्नेचर, पान पराग और राजश्री जैसे पान मसाला ब्रांड एमआरपी से करीब 25 फीसदी अधिक कीमत पर बेचे जा रहे हैं। वहीं तुलसी तंबाकू, बाबा 120, विल्स, गोल्ड फ्लैक और क्लासिक जैसी सिगरेटों पर ग्राहकों से निर्धारित मूल्य से कहीं ज्यादा रकम ली जा रही है। बताया जा रहा है कि इस पूरे खेल की शुरुआत थोक स्तर से हो रही है। थोक व्यापारी ही दुकानदारों को ऊंचे दामों पर माल उपलब्ध करा रहे हैं, जिसके बाद फुटकर विक्रेता उसी आधार पर उपभोक्ताओं से मनमानी वसूली कर रहे हैं। लोगों के मुताबिक जब इस बारे में व्यापारियों से सवाल किया जाता है तो उनका एक ही जवाब होता है। जीएसटी बढ़ गया है, माल महंगा आ रहा है, लेना है तो लो, नहीं तो जाओ।

हालांकि, हकीकत यह है कि कंपनियों की ओर से इन उत्पादों की एमआरपी में कोई आधिकारिक बढ़ोतरी नहीं की गई है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि अधिक कीमत का विरोध करने पर दुकानदार अभद्र व्यवहार करते हैं और कई बार उन्हें दुकान से भगा दिया जाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कस्बे के कुछ बड़े थोक व्यापारी इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे हैं और उनकी मिलीभगत से यह ‘ओपन लूट’ जारी है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रशासन और जीएसटी विभाग की नजरों के सामने यह सब हो रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि एमआरपी से अधिक वसूली के इस खुले खेल पर आखिर कब लगाम लगेगी और उपभोक्ताओं को राहत कब मिलेगी।

यह भी पढ़ें : राजनीति में कभी 'फुल स्टॉप' नहीं लगता: रिटायर हो रहे राज्यसभा सदस्यों को पीएम मोदी का भावुक संदेश

संबंधित समाचार