Bareilly: नंबरों की दौड़ में निगम ''बेपरवाह'', कर्मचारियों की जान दांव पर

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग पाने की होड़ ने नगर निगम का प्रकाश विभाग इस कदर बेपरवाह है कि उसे अपने ही कर्मचारियों की जान की परवाह नहीं है। केंद्रीय टीम के 26 जनवरी के बाद संभावित दौरे को लेकर निगम के तमाम विभाग अलर्ट मोड में हैं। 

शहर को चमकाने के दावे किए जा रहे हैं और खास तौर पर प्रकाश विभाग को युद्धस्तर पर काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सड़कों से लेकर वार्डों की गलियों तक खराब स्ट्रीट लाइटें बदली जा रही हैं। अफसरों की फाइलों में बरेली पूरी तरह तैयार दिख रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह तैयारी सिर्फ निरीक्षण के लिए की जा रही दिखावटी कवायद बनकर रह गई है।

शहर के 80 वार्डों में बड़ी संख्या में स्ट्रीट लाइटों को बदलने का काम चल रहा है, लेकिन यह काम सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर कराया जा रहा है। बिजली के खंभों पर चढ़े कर्मचारी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के काम करते नजर आ रहे हैं। न हेलमेट, न सेफ्टी बेल्ट, न इंसुलेटेड दस्ताने-खुले तारों और हाई वोल्टेज के बीच कर्मचारी हर पल मौत के साए में काम करने को मजबूर हैं। ऊपर से दबाव है कि काम हर हाल में समय पर पूरा होना चाहिए। एक छोटी सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है, लेकिन विभाग को इससे कोई सरोकार नहीं दिखता।

 यह साफ संकेत है कि निगम के लिए कर्मचारी सिर्फ आंकड़े और टारगेट पूरे करने का जरिया हैं, उनकी जान की कोई अहमियत नहीं। इस पूरी स्थिति में सबसे बड़ा सवाल सिस्टम में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों पर उठता है। हीटर जलाकर कमरों में बैठकर प्रगति रिपोर्ट पर दस्तखत करने वाले अफसरों को यह तक देखने की फुर्सत नहीं कि काम किन हालात में कराया जा रहा है। नियम-कानून सिर्फ कागजों तक सीमित हैं और जमीन पर खुलेआम उनकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा, अगर वक्त रहते सुरक्षा इंतजाम नहीं सुधारे गए, तो यह नंबरों की दौड़ नगर निगम के लिए सबसे बड़े सवाल और किसी परिवार के लिए कभी न भरने वाला नुकसान बन सकती है।

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