KGMU में मजारों को लेकर घमासान : ध्वस्तीकरण नोटिस से नाराज धर्मगुरु-सामाजिक संगठन, सांसद चंद्रशेखर ने उपमुख्यमंत्री को लिखा पत्र
लखनऊ, अमृत विचार : किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) परिसर में स्थित मजारों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मजारों पर ध्वस्तीकरण संबंधी नोटिस चस्पा किए जाने के बाद मुस्लिम धर्म गुरुओं के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। मामला अब राजनीतिक स्तर तक पहुंच गया है।
केजीएमयू के क्वीनमेरी अस्पताल, रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग, ट्रॉमा सेंटर, आर्थोपैडिक्स सहित कई स्थानों पर मजारें स्थित हैं। बीते दिनों कुछ हिंदू संगठनों ने केजीएमयू परिसर में मौजूद मजारों पर आपत्ति जताते हुए उनके औचित्य पर सवाल खड़े किए थे। संगठनों का कहना था कि अस्पताल परिसर में मजारों के कारण मरीजों और तीमारदारों को असुविधाओं का सामना करना पड़ता है।
मरीजों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए केजीएमयू प्रशासन ने संबंधित मजारों पर नोटिस चस्पा कर 15 दिन के भीतर उन्हें हटाने के निर्देश दिए हैं। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि तय समय सीमा में मजार नहीं हटाए जाने की स्थिति में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई के विरोध में पहले ही मुस्लिम धर्म गुरुओं ने नाराजगी जताई थी। अब लोकसभा सांसद चंद्रशेखर ने उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक को पत्र लिखकर मजारों को न तोड़ने की अपील की है। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि केजीएमयू परिसर में स्थित ऐतिहासिक दरगाह शाहमीना शाह, हजरत हाजी हरमैन सहित अन्य मजारों को हटाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किया गया है, जिससे उलेमाओं, दरगाह कमेटियों और आम नागरिकों में गहरी चिंता और रोष व्याप्त है।
सांसद ने पत्र में उल्लेख किया कि यह एक स्थापित ऐतिहासिक तथ्य है कि ये दरगाहें और मजारें केजीएमयू की स्थापना से भी पहले की हैं। हजरत हाजी हरमैन की दरगाह की नींव लगभग 15वीं सदी (1426 ई.) में रखी गई थी, जबकि केजीएमयू की स्थापना वर्ष 1912-13 में हुई। उस समय नुजूल विभाग द्वारा दरगाहों और केजीएमयू परिसर की भूमि का स्पष्ट सीमांकन भी किया गया था।
