दिल्ली हाई कोर्ट- पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर कोई रोक नहीं
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि पूर्व भाजपा सांसद बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ कई महिला पहलवानों द्वारा दायर यौन उत्पीड़न मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर कोई रोक नहीं है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा ने यह बयान भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व प्रमुख की एफआईआर और उनके खिलाफ दर्ज आरोपों को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई के लिए 21 अप्रैल की तारीख तय करते हुए दिया।
याचिकाकर्ता के वकील द्वारा स्थगन का अनुरोध किए जाने पर न्यायाधीश ने याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी और अगली सुनवाई की तारीख पर निचली अदालत के रिकॉर्ड मंगवाए। बृज भूषण के वकील द्वारा मुख्य वकील की अनुपलब्धता का हवाला देते हुए स्थगन का अनुरोध किए जाने पर अदालत ने सवाल किया कि याचिकाकर्ता द्वारा इस मामले पर अभी तक बहस क्यों नहीं की गई है।
न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा,"आप इस पर बहस क्यों नहीं कर रहे हैं? आपने याचिका दाखिल की है, लेकिन इस पर एक बार भी बहस नहीं हुई है।" इस पर बृज भूषण के वकील ने भरोसा दिलाया कि अगली तारीख पर याचिका पर बहस की जाएगी। अदालत ने साफ कहा, "कोई रोक नहीं है। यह स्पष्ट किया जाता है कि निचली अदालत की कार्यवाही पर कोई स्थगन नहीं है।"
सिंह ने वर्ष 2024 में उच्च न्यायालय का रुख करते हुए कहा था कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है और उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। अपनी याचिका में उन्होंने आरोप लगाया कि जांच पक्षपातपूर्ण तरीके से की गई और केवल पीड़ितों के बयानों को ही आधार बनाया गया, जो उनसे बदला लेना चाहते थे। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपों की सच्चाई की जांच किए बिना ही निचली अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दी गई।
निचली अदालत ने 21 मई, 2024 को यौन उत्पीड़न, धमकी और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप तय किए। इस मामले में सह-आरोपी और डब्ल्यूएफआई के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर के खिलाफ भी आपराधिक धमकी का आरोप तय किया था। दिल्ली पुलिस ने मई 2023 में उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
