Beating Retreat Ceremony : विजय चौक पर बजाई गई वंदे मातरम् की धुन, राष्ट्रपति मुर्मू को तीनों सेनाओं ने दिया नेशनल सैल्यूट
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस के संगीतमय समापन समारोह बीटिंग रिट्रीट में विजय चौक पर पारंपरिक और आधुनिक युद्ध कौशल के संगम की झलक दिखाई दी जिसमें एक ओर 'गगनयान', ब्रह्मोस, मिग-21 की सांकेतिक आकृतियों के माध्यम से आधुनिक विज्ञान और रणकौशल को प्रदर्शित किया गया वहीं दूसरी ओर देव व्यूह, अर्ध-चंद्र व्यूह, गरूड़ व्यूह जैसी महाभारत कालीन प्राचीन युद्ध व्यूह रचनाओं से पारंपरिक सैन्य कौशल को दिखाया गया।
इस अवसर पर गुरुवार को यहां विजय चौक पर तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर और राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, प्रमुख रक्षाध्यक्ष जनरल अनिल चौहान तथा तीनों सेनाओं के प्रमुखों की उपस्थिति में तीनों सेनाओं एवं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के बैंड ने देशभक्ति से सराबोर धुनों की संगीतमय प्रस्तुति दी।

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150 वीं वर्षगांठ को समर्पित इस समारोह की शुरुआत संयुक्त बैंड (मैस्ड बैंड) द्वारा आजाद हिंद फौज के सैन्यगीत 'कदम कदम बढ़ाए जा' की प्रस्तुति के साथ हुई। फिर पाईप्स एंड ड्रम्स बैंड ने 'अतुल्य भारत', 'वीर सैनिक', 'मिली जुली' आदि धुनों की प्रस्तुति दी। इसके बाद सीएपीएफ, नौसेना, वायु सेना और थल सेना के बैंडों ने 'विजय भारत', 'जय हो', 'ब्रेव वॉरियर', 'ट्वाइलाइट', 'आरंभ है प्रचंड है', ' ए वतन, ए वतन', 'आनंद मठ', 'सुगम्य भारत' और 'सितारे हिंद' जैसी धुनों की प्रस्तुति दी।
तीनों सेनाओं एवं सीएपीएफ के बैंड ने तीव्र मार्च (क्वीक मार्च) एवं संगीत के साथ-साथ विभिन्न आकृतियां भी बनाई जिसमें परंपरा और आधुनिकता का शानदार समन्वय देखने को मिला। सेना के जवानों ने जहाँ एक ओर 'गगनयान', ब्रह्मोस, मिग-21 जैसे देश की आधुनिक विज्ञान और रण कौशल को प्रदर्शित करने के लिए सांकेतिक आकृतियां बनायीं वहीं भारत की प्राचीन सैन्य कौशल और परंपरा को प्रदर्शित करने के लिए देव व्यूह, अर्ध-चंद्र व्यूह, गरूड़ व्यूह जैसी महाभारत कालीन प्राचीन युद्ध व्यूह रचनाओं को भी विजय चौक पर पेश किया।
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इस साल के बीटिंग रीट्रिट समारोह का मुख्य आकर्षण रही ऑपरेशन सिंदूर की प्रतीकात्मक प्रस्तुति। वायु सेना बैंड के ड्रम लाइट से सुसज्जित थे, जिनपर 'ऑपरेशन सिंदूर' लिखा हुआ था और उसका लोगो लगा हुआ था। दर्शकों का उत्साह तब चरम पर पहुंच गया जब थल सेना के बैंड ने सुगम्य भारत और अन्य धुनों के साथ नारी शक्ति को प्रदर्शित करते हुए 'महिला क्रिकेट विश्व कप 2025' की आकृति बनाई। दर्शकों ने तब भी तालियों के गड़ड़ाहट के साथ सेना का स्वागत किया जब थल सेना बैंड ने ड्यूटी पर तैनात 'भारतीय सैनिक' की आकृति बनाई।

इस बार के समारोह में राजस्थानी, नेपाली के साथ-साथ अन्य लोक धुनों की भी गुंज सुनाई दी। इसके अतिरिक्त इस बार पुखराज, सरोद, सितार, तबला आदि वाद्य यंत्रों से भी प्रस्तुति दी गयी। संगीतमय प्रस्तुति के सबसे आखिर में बंकीम चंद्र चटर्जी और यदुनाथ भट्टाचार्य द्वारा रचित वंदे मातरम् की पूर्ण प्रस्तुति दी गई, जिसके बाद ध्वज के आरोहण के साथ समारोह का समापन हुआ।
