Moradabad: महंगाई ने किया बेहाल, जरूरत की हर चीज महंगी, बजट में राहत की उम्मीद कर रहीं गृहणियां

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Published By Monis Khan
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ठाकुरद्वारा, अमृत विचार। लगातार आसमान छूती महंगाई ने रसोई ही नहीं, खाने-पीने की वस्तुओं, कपड़े समेत जरूरत की सभी चीजों को जकड़ लिया है। सोने-चांदी के आभूषणों को कीमतों ने गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की बेटियों के सपनों पर भी भारी चोट की है। माता-पिता आभूषण खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। दाल, आटा, चावल, खाद्य तेल, दूध, सब्जी कोई भी जरूरी वस्तु ऐसी नहीं बची, जिसने महंगाई की छलांग न लगाई हो। सीमित आय में घर चलाना हुनर नहीं, बल्कि संघर्ष बन गया है।

ऐसे हालात में 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से महिलाओं और मध्यम वर्ग को बड़ी राहत की उम्मीद है। गृहिणियों का कहना है कि महीने की शुरुआत में बजट बनाते समय सबसे पहले रसोई का हिसाब गड़बड़ा जाता है। गैस सिलेंडर की कीमतें हों या राशन का खर्च, हर मोर्चे पर जेब ढीली हो रही है। महिलाओं का कहना है कि सरकार को इस पर सख्त और ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि आम परिवारों को वास्तविक लाभ मिल सके। आवश्यक खाद्य पदार्थ सस्ते हों और महिलाओं के लिए ठोस बचत व कर राहत योजनाएं लाई जाएं।

वंदना शर्मा का कहना है कि बेटी-बेटे की शादी के लिए सोना-चांदी खरीदना भारतीय परिवारों की परंपरा रही है, लेकिन आज इनके दाम सुनकर ही लोग कांप जाते हैं। कीमतों में इतना उछाल तो कई सालों में नहीं हुआ जितना दो महीने में हो गया। जरूरत की सभी वस्तुएं महंगी हो रही हैं।

सोनिया चौहान ने कहा कि महंगाई ने बचत की गुंजाइश ही खत्म कर दी है। आमदनी जस की तस है, लेकिन खर्च कई गुना बढ़ चुका है। बजट से उम्मीद है कि इस बार महिलाओं के लिए केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले फैसले लिए जाएं।

सरबजीत कौर का कहना है कि आय और महंगाई के बीच बढ़ती खाई का बोझ सीधा निम्न मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है। यदि सरकार वास्तव में आम जनता की चिंता करती है, तो बजट में ऐसी योजनाएं लानी होंगी, जिनसे महिलाओं और परिवारों को सीधा लाभ मिले।

रीना देवी ने बिजली और गैस के बढ़ते बिलों पर चिंता जताते हुए कहा कि जब तक इन पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक घरेलू बजट संतुलित नहीं हो सकता। रसोई गैस पर सब्सिडी बहाल हो, बिजली दरें कम की जाएं । खाद्य पदार्थ की कीमतें भी कम हों।

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