Bareilly : सोने-चांदी की चढ़ती कीमतों से सीजन में भी बाजार सूना, पुराने के बदले नए गहने खरीदकर चल रहा काम
बरेली, अमृत विचार। सोने और चांदी की लगातार बढ़ती कीमतों में लगी ये आग कब तक ठंडी होगी अब यह बड़ा सवाल बन गया है। हर रोज सोना-चांदी की कीमतें भले ही रिकॉर्ड बना रही हैं लेकिन, शादी के सीजन नजदीक आने के बावजूद बाजार में खरीदार नदारद हैं।
इस असल वजह यह है कि इनकी कीमतें अब आम आदमी की हैसियत से बाहर की बात हो चुकी है। सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि बड़े निवेशक भले ही इस मौके का फायदा उठा रहे हैं, लेकिन खुदरा खरीदार बाजार में नहीं दिख रहे। महंगाई के चलते शादी के मौसम में भी ग्राहक सर्राफा दुकानों तक पहुंचने में हिचकिचा रहे हैं। फिलहाल बाजार में केवल 30 प्रतिशत ही कारोबार हो रहा है।
बरेली के बाजार में शनिवार को चांदी 3.50 लाख रुपये प्रति किलो और सोना 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। मात्र एक महीने के अंतराल में कीमतों में आई उछाल चौंकाने वाली है। इधर, आंकड़ों पर नजर डालें तो 21 दिसंबर 2025 को चांदी 2.08 लाख रुपये प्रति किलो थी, जो 22 जनवरी 2026 तक बढ़कर 3.15 लाख रुपये हो गई। इसी तरह इसी अवधि में सोना 1.35 लाख से बढ़कर 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक अस्थिरता के कारण दुनिया भर के बैंक अपनी करेंसी का बैकअप गोल्ड में कर रहे हैं। साथ ही, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (ईवी) और कंप्यूटिंग चिप्स में इन धातुओं की बढ़ती मांग ने भी कीमतों में आग लगा दी है। लोग अब पुराने गहने बदलकर या वजन कम कराकर अपनी जरूरतें पूरी करने को मजबूर हैं। वहीं, सोने-चांदी की कीमतों को लेकर सोशल मीडिया पर मीम्स भी बनने लगे हैं। कारोबारियों की बड़ी चिंता यह है कि कीमतों की यह दौड़ और कितनी आगे जाएगी।
इनकी सुने
वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता, बाजार में डिमांड और सप्लाई में आए बड़े अंतर और चीन के चांदी की माइनिंग कम करने के निर्णय ने कीमती धातुओं के बाजार में आग लगाई है। इसके चलते बड़े निवेशकों ने सिल्वर और गोल्ड में निवेश बढ़ा दिया है। कारोबार 30 फीसदी के करीब रह गया है। सोने और चांदी की कीमतें और बढ़ने की संभावना है।- संदीप अग्रवाल मिन्टू। -बरेली महानगर ज्वेलर्स एंड बुलियन एसोसिएशन
बड़े निवेशक तो गोल्ड में पैसा लगा रहे हैं, लेकिन खुदरा खरीदार हिचक रहे हैं। शादियों के सीजन में बाजार में हलचल कम है। आलम यह है कि मध्यम वर्ग के लोग पुराने गहने बदलकर या वजन घटाकर सोना और चांदी खरीदने को मजबूर हैं। वैश्विक अस्थिरता और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में बढ़ती मांग ने भी कीमतों को आसमान छूने पर मजबूर कर दिया है।-संजय अग्रवाल, सर्राफा कारोबारी
