बजट से पहले की मीठी शुरुआत... क्यों होती है हलवा सेरेमनी ? जानें अनोखी परंपरा
नई दिल्लीः आज केंद्रीय बजट पेश होने जा रहा है। इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 27 जनवरी 2026 को नॉर्थ ब्लॉक में पारंपरिक हलवा सेरेमनी में हिस्सा लिया। यह भारत की सबसे रोचक सरकारी रस्मों में से एक है, जो बजट की अंतिम तैयारियों को औपचारिक रूप से शुरू करती है।
हलवा सेरेमनी क्या है?
यह एक सालाना उत्सव है, जिसमें वित्त मंत्रालय के बजट से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बड़ी कढ़ाई में पारंपरिक हलवा बनाया जाता है। वित्त मंत्री खुद कढ़ाई को छूकर हलवा हिलाती हैं और फिर इसे सभी शामिल सदस्यों को परोसती हैं। यह रस्म भारतीय संस्कृति की उस परंपरा का प्रतीक है, जहां किसी बड़े काम की शुरुआत मीठा बांटकर की जाती है।
यह समारोह नई दिल्ली के रायसीना हिल्स में स्थित नॉर्थ ब्लॉक (वित्त मंत्रालय का मुख्यालय) के बजट प्रेस में आयोजित होता है। हलवा आमतौर पर आटा या सूजी, देसी घी और ड्राई फ्रूट्स से तैयार किया जाता है। हर साल इसकी तस्वीरें और वीडियो मीडिया में खूब छाते हैं।
असल में बनता है हलवा या सिर्फ नाम?
जी हां, असल में हलवा बनता है! यह कोई प्रतीकात्मक बात नहीं है। बड़ी कढ़ाई में हलवा पकाया जाता है और सभी को परोसा जाता है। यह कर्मचारियों के कड़ी मेहनत की सराहना भी है।
लॉक-इन पीरियड: गोपनीयता की सबसे सख्त व्यवस्था
हलवा सेरेमनी के तुरंत बाद बजट तैयार करने वाली टीम लॉक-इन पीरियड में चली जाती है। इसका मतलब है कि 60-70 अधिकारी और कर्मचारी नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में रहते हैं और बजट पेश होने तक (1 फरवरी 2026 तक) पूरी तरह अलग-थलग रहते हैं।
- बाहर जाना मना
- परिवार या किसी से संपर्क नहीं
- मोबाइल फोन, इंटरनेट या किसी भी संचार साधन पर रोक
- सीसीटीवी और खुफिया एजेंसियों की सतत निगरानी
यह सख्ती इसलिए है ताकि बजट की कोई भी जानकारी लीक न हो सके और बाजार पर कोई असर न पड़े।
परंपरा की शुरुआत कब हुई?
यह रिवाज 1950 के दशक में शुरू हुआ, जब एक बार बजट लीक होने की घटना हुई थी। तब से गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था चली आ रही है। भले ही आज बजट प्रक्रिया काफी हद तक डिजिटल हो गई हो, लेकिन यह मीठी परंपरा आज भी बरकरार है।
हलवा सेरेमनी न सिर्फ बजट की शुरुआत का संकेत है, बल्कि भारतीय परंपरा, गोपनीयता और टीमवर्क का खूबसूरत मिश्रण भी है। 1 फरवरी को जब वित्त मंत्री संसद में बजट पेश करेंगी, तो यह मीठी रस्म पूरी तरह सफल हो चुकी होगी!
