त्वरित टिप्पणी: बजट में तात्कालिक लाभ की बजाय भविष्य की नींव रखने पर जोर
वित्त मंत्री सीतारमण ने रविवार को संसद में अपना 9वां बजट पेश करते हुए ''एक्शन ओवर एम्बिवैलेंस'' (दुविधा के ऊपर क्रियाशीलता) का मंत्र अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि सरकार का ध्यान तात्कालिक चुनावी लाभ के बजाय भविष्य की नींव रखने पर है। यह बजट केवल आवंटन का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक बदलाव की रूपरेखा है, जो मुख्य रूप से चार स्तंभों-बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सृजन पर टिका है।
सरकार ने उपभोग - आधारित विकास (Consumption-led growth) के बजाय उत्पादकता-आधारित विकास (Productivity-led growth) का मार्ग चुना है। जहां 2025 का बजट व्यक्तिगत राहत और उपभोग बढ़ाने पर केंद्रित था, वहीं 2026 का यह बजट स्थिरता, मैन्युफैक्चरिंग और आर्थिक दक्षता को प्राथमिकता देता है।
बुनियादी ढांचा और शहरी सुगमता : ₹12.2 लाख करोड़ का निवेश
इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹12.2 लाख करोड़ का रिकॉर्ड आवंटन केवल सड़कों और पुलों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक उद्देश्य भारत की लॉजिस्टिक लागत को कम करना और वैश्विक आपूर्ति श्रंखला में देश की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है। बेहतर कनेक्टिविटी का एक बड़ा सामाजिक प्रभाव यह होगा कि शहरों के बीच यात्रा का समय घटेगा, जिससे ''रिवर्स माइग्रेशन'' या संतुलित शहरीकरण को बढ़ावा मिलेगा। अब छोटे शहरों के लोग बड़े महानगरों में काम करते हुए भी अपने मूल निवास पर रह सकेंगे, जिससे बड़े शहरों में आवास की समस्या और मलिन बस्तियों का दबाव कम होगा। यह शहरी विकास के एक नए मॉडल की शुरुआत है जहाँ भौतिक दूरी अब आर्थिक अवसर के आड़े नहीं आएगी।
शिक्षा और कौशल : ''जॉब-रेडी'' वर्क फोर्स का निर्माण
शिक्षा क्षेत्र में सरकार ने ''किताबी ज्ञान'' से परे जाकर ''जॉब-रेडी'' कौशल पर ध्यान केंद्रित किया है। 15,000 स्कूलों में AVGC (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स) कंटेंट क्रिएटर लैब की स्थापना और पांच नई यूनिवर्सिटी टाउनशिप की घोषणा भारत को भविष्य की ''क्रिएटर इकोनॉमी'' के लिए तैयार करने का प्रयास है। सबसे महत्वपूर्ण पहल हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण है, जो ग्रामीण क्षेत्रों की मेधावी छात्राओं के लिए STEM (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग, गणित) के द्वार खोलेगा। यह कदम न केवल महिला साक्षरता दर को सुधारेगा, बल्कि भारत के ''लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट'' (LFPR) में महिलाओं की हिस्सेदारी को भी गुणात्मक रूप से बढ़ाएगा।
स्वास्थ्य और केयर इकोनॉमी : एक सामाजिक बदलाव
स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट का दृष्टिकोण ''ईंट-पत्थर'' के निर्माण से आगे बढ़कर ''केयर इकोनॉमी'' की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने वाला है। डेढ़ लाख मल्टी-स्किल्ड केयर गिवर्स का प्रशिक्षण और पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब का निर्माण स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण की दिशा में बड़ा कदम है। कैंसर की 17 दवाओं पर ड्यूटी खत्म करना मध्यम वर्ग को बड़ी राहत प्रदान करेगा। साथ ही, NIMHANS 2.0 के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य को मुख्यधारा की चिकित्सा में शामिल करना एक ऐतिहासिक सामाजिक बदलाव है, जो भारत की उत्पादकता को मानसिक स्तर पर भी सुदृढ़ करेगा। यह दर्शाता है कि सरकार स्वास्थ्य को केवल बीमारी के इलाज के रूप में नहीं, बल्कि संपूर्ण कल्याण (Well-being) के रूप में देख रही है।
तुलनात्मक निष्कर्ष : 2025 बनाम 2026 का आर्थिक प्रतिमान
2025 और 2026 के बजटों के बीच का अंतर वास्तव में भारत की आर्थिक परिपक्वता को दर्शाता है। यदि 2025 का बजट ''पैसा हाथ में देने वाला'' (Money in hand) बजट था, तो 2026 का बजट ''अवसर हाथ में देने वाला'' (Opportunity in hand) बजट है। पिछले वर्ष जहां टैक्स व्यवस्था को डिफॉल्ट बनाकर व्यक्तिगत राहत दी गई थी, वहीं इस वर्ष अनुपालन (Compliance) को सरल बनाने और विदेश यात्रा व शिक्षा पर TCS घटाने जैसे कदमों से मध्यम वर्ग के लिए वैश्विक अवसरों को सुगम बनाया गया है। यह बजट अल्पकालिक लोकलुभावनवाद के स्थान पर दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है, जिसका प्रभाव तत्काल नकद लाभ के बजाय बेहतर जीवन गुणवत्ता, उच्च रोजगार अवसर और एक सशक्त आर्थिक इकोसिस्टम के रूप में परिलक्षित होगा।
प्रो. शिखा वर्मा, अर्थशास्त्र विभाग, बरेली कॉलेज
