इलाहाबाद हाईकोर्ट में 50 निजी सचिवों के अस्थाई पद सृजित, न्यायिक कार्यों में मिलेगी प्रशासनिक मजबूती
लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायिक कार्यों को अधिक प्रभावी और सुचारु बनाने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने निजी सचिव संवर्ग के 50 अस्थायी पदों के सृजन को लेकर सोमवार को नया शासनादेश जारी किया है। इसके तहत अब न्यायमूर्तियों की स्वीकृत संख्या 160 के सापेक्ष प्रभावी संख्या 150 मानते हुए ये पद सृजित किए गए हैं। यह शासनादेश 3 अगस्त 2022 को जारी पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए जारी किया गया है।
शासनादेश के अनुसार, पहले निजी सचिवों की नियुक्ति को इस शर्त से जोड़ा गया था कि न्यायमूर्तियों की कार्यरत संख्या 125 तक पहुंचे। बाद में यह पाया गया कि यह शर्त “द इलाहाबाद हाईकोर्ट प्राइवेट सेक्रेटरीज (कंडीशंस ऑफ सर्विस) रूल्स, 2001” के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। नियमों के अनुसार, न्यायमूर्तियों के साथ केवल निजी सचिव ही कार्यरत रह सकते हैं, न कि अपर निजी सचिव। इसी आधार पर 2022 के शासनादेश में सृजित 17 अपर निजी सचिव और 33 निजी सचिव के कुल 50 अस्थायी पदों को लेकर लगी शर्त को हटाते हुए नया आदेश जारी किया गया है।
नए शासनादेश के तहत निजी सचिव संवर्ग के 50 अस्थायी पद 28 फरवरी 2026 तक के लिए सृजित किए गए हैं, बशर्ते इन्हें उससे पहले बिना पूर्व सूचना समाप्त न किया जाए। पदों का वर्गीकरण भी स्पष्ट कर दिया गया है। इसमें ग्रेड-1 निजी सचिव के 23 पद, सहायक निबंधक-कम-निजी सचिव के 12 पद, उप निबंधक-कम-निजी सचिव के 10 पद, संयुक्त निबंधक-कम-निजी सचिव के 4 पद तथा निबंधक-कम-प्रधान निजी सचिव का 1 पद शामिल है।
