विश्व कैंसर दिवस : अमृत विचार और रोहिलखंड कैंसर संस्थान दो दिन चलाएगा जागरूकता मुहिम
बरेली, अमृत विचार। रोहिलखंड कैंसर संस्थान अमृत विचार के सहयोग से विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर बुधवार और गुरुवार को दो दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। यह कार्यक्रम विभिन्न विद्यालयों में आयोजित किये जाएंगे।
कार्यक्रम में कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम विद्यार्थियों को कैंसर से बचाव के संबंध में विभिन्न पहलुओं पर जानकारी देंगे। रोहिलखंड कैंसर संस्थान के डॉ. प्रारब्ध सिंह कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। सोब्तीज पब्लिक स्कूल, केशलता इंटरनेशनल स्कूल, नारायणा ई-टेक्नो स्कूल में बुधवार को कार्यक्रम होंगे। 5 फरवरी को जीके सिटी मोंटेसरी स्कूल, जय नारायण सरस्वती स्कूल और नालंदा पब्लिक स्कूल में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कैंसर से घबराने और डरने की जरूरत नहीं
- रोहिलखंड कैंसर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. अर्जुन अग्रवाल का कहना है कि पूरी दुनिया में विश्व कैंसर दिवस मनाते हैं, जिसका मकसद ये है कि पूरी दुनिया में लोगों को जागरूक किया जाए और उन्हें बताया जाए कि कैंसर क्या है, ये क्यों होता है। इससे कैसे बचा जा सकता है और कैंसर का इलाज क्या है। कैंसर दिवस पर यही संदेश है कि इससे घबराने और डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आज कैंसर का इलाज पूरी तरह मौजूद है।
कैंसर के ये आंकड़े
- देश में तंबाकू की वजह से मुंह के कैंसर से प्रतिदिन 3500 लोगों की मृत्यु। वर्ष 2018 में कैंसर से कुल 7,84,921 लोगों की मौत।
- धुएं (बीड़ी, सिगरेट के धुएं सहित) से वर्ष 2018 में 3,17,928 लोगों की मौत।
- कैंसर से मरने वाले पुरुषों में सबसे ज्यादा 25 फीसदी वजह मुंह और फेफड़ों का कैंसर, जबकि महिलाओं में सबसे ज्यादा 25 फीसदी वजह मुंह और ब्रेस्ट कैंसर।
बीमारी से होने वाली मौतों में कैंसर दूसरा सबसे बड़ा कारण
- वैश्विक रूप से देखें तो बीमारी से होने वाली मौतों में कैंसर दूसरा सबसे बड़ा कारण हैं। वर्ष 2018 में करीब 96 लाख लोगों की कैंसर से जान गई थी। यानि छह में एक मरीज के निधन की वजह कैंसर बना। फेफड़ा, प्रोस्टेट, कोलोरेक्टल, पेट और लिवर कैंसर से पुरुष ज्यादा प्रभावित हुए, जबकि ब्रेस्ट, कोलोरेक्टल, फेफड़ा और सर्वाइकल कैंसर ने महिलाओं पर ज्यादा असर डाला है।
खानपान, जीवनशैली और प्रदूषण कैंसर के लिए जिम्मेदार
बरेली : एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के डाॅ.पियूष कुमार अग्रवाल कहते हैं कि कैंसर खुद में कोई बीमारी नहीं, बल्कि कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि है। जो शरीर के किसी भी अंग में, कभी भी और किसी भी उम्र हो सकती है। यह वृद्धि एक अंग से होती हुई शरीर के दूसरे भाग को भी प्रभावित कर सकती है। शरीर का न भरने वाला घाव, किसी अंग विशेष में लगातार दर्द, तेजी से बढ़ रही गांठ कैंसर की वजह हो सकती है। हां हर गांठ कैंसर नहीं होती है। अस्वास्थ्य कर खानपान, जीवनशैली और प्रदूषण कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं। इससे बचाव और जागरूकता कैंसर रोकने में कारगर है।
समय से इलाज कराएं तो कैंसर से मुक्ति पाना बहुत मुश्किल नहीं
रुहेलखंड क्षेत्र में कैंसर रोगियों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। अकेले बरेली में कैंसर रोगियों की संख्या 11 हजार के पार बतायी जा रही है। कैंसर विशेषज्ञों के मुताबिक खानपान में बेपरवाही और शुरुआत में कैंसर के लक्षण पहचानने में देरी और इलाज न कराना सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है। कैंसर के इलाज के लिए अत्याधुनिक तकनीकें हैं, अगर समय से इलाज कराया जाए तो कैंसर से मुक्ति पाना बहुत मुश्किल नहीं है। कैंसर से लड़ाई में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि सरकारी अस्पतालों में इस रोग के इलाज का इंतजाम नहीं है। बदायूं, शाहजहांपुर और पीलीभीत में तो कैंसर रोग विशेषज्ञ ही नहीं हैं। यही वजह है कि हर तीन महीने में दो कैंसर रोगियों की मृत्यु हो जाती है। बरेली जिले के कई इलाकों में कैंसर के मामले औसत से कई गुना ज्यादा हैं। आंवला और मीरगंज तहसील में कई सालों से कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ रही है। इन इलाकों में खराब भूजल को भी कैंसर की वजह माना जाता रहा है।
