मिर्जापुर धर्मांतरण मामले में आरोपियों को हाईकोर्ट से मिली जमानत

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Published By Deepak Mishra
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मिर्जापुर में कथित गैरकानूनी धार्मिक धर्मांतरण से जुड़े मामले में तमिलनाडु निवासी आरोपी को जमानत दे दी। यह आदेश न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की एकलपीठ ने देव सहायम डेनियल राज और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

मामले के अनुसार उत्तर प्रदेश पुलिस का आरोप है कि अभियुक्त एक गिरोह का सरगना था, जो गरीब, कमजोर तथा आदिवासी लोगों को ‘उपचार प्रार्थना सभाओं’ और आर्थिक सहायता का लालच देकर ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के लिए प्रेरित करता था।

पुलिस का दावा है कि गिरोह अब तक लगभग 70 लोगों का धर्म परिवर्तन करा चुका था तथा पिछले सितंबर में गिरफ्तारी के समय अन्य 500 लोगों के धर्मांतरण की योजना थी। पूछताछ में डेनियल ने कथित रूप से स्वयं को इंडियन मिशनरीज सोसाइटी (तमिलनाडु) का फील्ड इंचार्ज बताया और कहा कि उसके अधीन आठ मिशनरी कार्यरत हैं, जिन्हें संस्था वेतन और प्रचार के लिए धन उपलब्ध कराती है।

डेनियल और सह-आरोपी पारस 30 सितंबर 2025 से जेल में हैं और उनके विरुद्ध उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 और 5(1) के तहत मामला दर्ज है। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान याचियों के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि अभियुक्त को झूठा फंसाया गया है और प्राथमिकी इंद्रसन सिंह नामक व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज हुई है, जो न तो पीड़ित है और न ही किसी पीड़ित का रक्त संबंधी है।

याचियों की ओर से राजेंद्र बिहारी लाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2025) में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर भरोसा दिखाया गया, जिसमें कहा गया है कि ऐसे मामलों में अभियोजन की शुरुआत केवल पीड़ित या उसके निकट संबंधियों के अनुरोध पर ही की जा सकती है।

यह भी कहा गया कि अभियुक्तों के कब्जे से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई। राज्य की ओर से जमानत का विरोध किया गया, लेकिन न्यायालय ने आरोपों की प्रकृति, संभावित सजा की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों तथा गवाहों से छेड़छाड़ की आशंका जैसे पहलुओं पर विचार करते हुए अभियुक्तों को जमानत दे दी।

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