Bareilly : यूजीसी नोटिफिकेशन पर सुप्रीम रोक से नीति सुधार को मौका
व्यापार और चिकित्सा जगत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को व्यावहारिक और सकारात्मक कदम बताया
बरेली, अमृत विचार। सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नोटिफिकेशन पर रोक लगाई है। यह फैसला उच्च शिक्षा में समता और गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। उद्यमियों, चिकित्सकों और व्यापारियों का मानना है कि यूजीसी के कुछ प्रावधान जल्दबाजी में लागू किए गए थे, जिनमें कानून की असमानताएं और अधिकारों के संभावित हनन के मामले सामने आ सकते थे। चिकित्सकों ने इस फैसले को उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए स्वागतयोग्य कदम बताया है। वहीं उद्यमी और व्यापारिक नेता भी इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं, उनका कहना है कि नीति लागू करने से पहले संसाधनों, संस्थानों की क्षमता और व्यावहारिकता पर ध्यान देना अनिवार्य है, जबकि विपक्ष इसे सरकार की नाइंसाफी बता रहा है। बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय शिक्षा नीति में संतुलन और दीर्घकालिक सोच के लिए मार्गदर्शक माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला स्वागतयोग्य है। शिक्षा में समानता जरूरी है, लेकिन उसे लागू करने का तरीका भी व्यावहारिक होना चाहिए था। कानून में कुछ असमानाताएं होने की वजह से अधिकारों का हनन हो रहा था। इसके दुरुपयोग की आंशका भी बढ़ गई थी। यह फैसला पूरी तरह से राष्ट्र हित में लिया गया है।-दिनेश गोयल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईआईए।
सुप्रीम रोक लगना जरूरी था, देशभर में इसको लेकर हंगामा मचा हुआ था। यूजीसी के कुछ प्रावधान जल्दबाजी में लागू किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट की रोक से अब सभी पक्षों को साथ बैठकर बेहतर और समावेशी नीति बनाने का मौका मिलेगा, जिससे शिक्षकों और छात्रों दोनों का हित सुरक्षित रहेगा। - तुनज भसीन, राष्ट्रीय महासचिव, आईआईए।
सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नोटिफिकेशन को रोके जाने का निर्णय निर्णय उच्च शिक्षा में संतुलन और गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में अहम है। कोर्ट ने सही समय पर हस्तक्षेप किया है। सरकार को इसमें गहन परीक्षण की आवश्यकता है, ताकि कानून में किसी तरह की असमानता न रहे और सभी पक्षों को स्वीकार्य हो। - राजेंद्र गुप्ता सदस्य राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड भारत सरकार।
यूजीसी के नोटिफिकेशन को लेकर जिस तरह देशभर में विरोध चल रहा था, बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट को इस्तीफा तक देना पड़ा। ऐसे समय में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिया गया यह फैसला सवर्ण समाज के हित में स्वागत योग्य है। अब सरकार को चाहिए नियमों को लेकर पक्ष और विपक्ष आमने-सामने बैठाकर बात करे। -अनिल अग्रवाल, जिलाध्यक्ष, भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल।
उच्च शिक्षा देश की बुनियाद है। यूजीसी के कुछ प्रावधानों को लेकर शिक्षकों में भी असमंजस था। रोक लगने से अब सभी हितधारकों से चर्चा कर बेहतर ढांचा तैयार किया जा सकता है। सभी वर्गों के छात्रों के लिए समानता का अधिकार बेहद जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरी तरह से स्वाग्तयोग्य है। - डा. विमल भारद्वाज, वरिष्ठ चिकित्सक।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से यूजीसी कानून पर रोक लगाना समाज के लिए हर्ष की बात है। इस कानून से समाज में जातिगत भेदभाव बढ़ने की संभावना के साथ ही सवर्ण विभाजन की स्थिति पैदा होने की संभावना बनी थी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय हर वर्ग में संतुलन और गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में अहम है। -डा. सुदीप सरन, वरिष्ठ चिकित्सक।
सुप्रीम कोर्ट की रोक से यह स्पष्ट हुआ है कि किसी भी शैक्षणिक सुधार को लागू करने से पहले उसके व्यवहारिक पक्ष, संसाधनों की उपलब्धता और संस्थानों की क्षमता पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है। यह रोक किसी विचारधारा के खिलाफ नहीं है, बल्कि नीति को बेहतर बनाने का मौका है। -डॉ. अनूप आर्य, वरिष्ठ दंत चिकित्सक।
उच्चतम न्यायालय के निर्णय का वे स्वागत करते हैं। यूजीसी कानून के माध्यम से सरकार सनातन धर्म को जातियों में बांटने की कोशिश कर रही है, जबकि आज आवश्यकता देश को जातिविहीन समाज की ओर ले जाने की है। यूजीसी कानून से देश में लोगों के बीच आपसी वैमनस्य और नफरत फैलने की आशंका है। - अशफाक सकलैनी, जिलाध्यक्ष कांग्रेस।
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नोटिफिकेशन पर रोक लगाकर भाजपा सरकार की देश को जातियों में बांटने की साजिश को पूरी तरह से नाकाम कर दिया है। भाजपा सरकार न केवल सामान्य वर्ग, बल्कि पूरे सनातन धर्म के लिए एकतरफा और विभाजनकारी सोच बन चुकी है। -पंडित राज शर्मा, प्रवक्ता कांग्रेस।
यह सरकार की नीतिगत विफलता है। इसके चलते देशभर में हंगामा मचा हुआ था। यूजीसी के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में जो सुधार लाए जा रहे थे, वे सामाजिक न्याय और समान अवसर की दिशा में थे। सुप्रीम कोर्ट की रोक यह दिखाती है कि सरकार ने पर्याप्त तैयारी और संवाद के बिना फैसले थोपे और इसका विरोध हुआ। - डा. जयपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, बसपा।
