एरीज के लिए खास मददगार साबित होगा अंतरिक्ष स्टेशन
पहले एस्ट्रोसेट और दूसरा आदित्य एल-1 के बाद इसरो की अंतरिक्ष में एक और लंबी छलांग की तैयारी है। इस सफलता के बाद भारत यूनाइटेड स्टेट और चीन के समकक्ष खड़ा हो जाएगा। बात अगर उत्तराखंड की करें तो यहां नैनीताल में स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के वैज्ञानिकों के लिए यह स्टेशन अंतरिक्ष के अध्ययनों में काफी मददगार साबित होगा। तकनीकी रूप से यह उन्नत होगा। इस अंतरिक्ष मिशन से जुटाए जाने वाले आंकड़े एरीज के वैज्ञानिकों के लिए बेहद मददगार साबित होंगे और एरीज के लिए यह दोहरा लाभ देने वाला मिशन साबित होगा।
दरअसल, अंतरिक्ष स्टेशन अत्याधुनिक तकनीक व अत्यंत सुविधाजनक है, जो पृथ्वी की ऑर्बिट से अंतरिक्ष को चारों ओर से देख सकता है। वर्ष 2028 में प्रस्तावित यह परियोजना देश के पास चलती-फिरती प्रयोगशाला होगी, जो जमीनी दूरबीनों की तुलना में कहीं अधिक कारगर होगी। इस प्रयोगशाला के जरिए चांद, तारे, ग्रह, नक्षत्रों और सुदूर अंतरिक्ष में किसी भी दिशा को देखा जा सकता है और सटीक आंकड़े जुटाए जा सकते हैं। एरीज सौर अध्ययन के साथ अंतरिक्ष मौसम का महत्वपूर्ण अध्ययन करता है। एरीज की वेदशाला में स्थापित सोलर टेलीस्कोप सूर्य और सोलर फ्लेयर्स पर नजर रखती है। अंतरिक्ष स्टेशन से मिले रियल टाइम डाटा से एरीज के अध्ययन में मदद मिल सकेगी। इसके अलावा एरीज की देव स्थल स्थित 3.6 मीटर की ऑप्टिकल दूरबीन है। इसके जरिए अंतरिक्ष से जुटाया गए आंकड़ों का मिलान अंतरिक्ष स्टेशन से प्राप्त आंकड़ों से किया जा सकेगा। माइक्रोग्रैविटी में किए गए प्रयोगों के नतीजे खगोल विज्ञान, कॉस्मिक रेडिएशन और एटमॉस्फेरिक स्टडीज़ में मदद मिलेगी।
यह सभी एरीज के रिसर्च से जुड़े हुए महत्वपूर्ण अध्ययन क्षेत्र हैं। इसके अलावा एरीज हिमालय के वातावरण पर काम करता है जिसे लेकर एरीज में एसटी रडार स्थापित किया गया है। अंतरिक्ष स्टेशन का एक महत्वपूर्ण कार्य जलवायु समेत हमारी वायुमंडलीय स्थिति में नजर रखना होगा लिहाजा अंतरिक्ष स्टेशन से जुटाए आंकड़ों से एरीज के वैज्ञानिकों के लिए शोध व अन्य अध्ययनों में आसानी हो जाएगी। कुल मिलाकर भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन न केवल एरीज, बल्कि देश के तमाम अंतरिक्ष और जलवायु पर अध्ययन करने वाली संस्थाओं के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।
एरीज के वरिष्ठ खगोल वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे कहते हैं कि इसमें दोराय नहीं है कि देश अंतरिक्ष के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है और अभी तक विश्व में अलग पहचान बनाने में कामयाब हुआ है। अंतरिक्ष स्टेशन बेहद महत्वपूर्ण मिशन है और किसी भी देश का अंतरिक्ष से खुद के अध्ययन का सपना सच हो सकता है और इसरो भारतीय वैज्ञानिकों का यह साकार करने जा रहा है। इस मिशन की सफलता से वैज्ञानिक नभ, जल और थल पर अध्ययन कर सकेंगे। अभी तक पृथ्वी की निचली कक्षा में यूएस का इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन और चीन का तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन मौजूद है और अब भारत अंतरिक्ष स्टेशन वाला तीसरा देश बन जाएगा।-प्रस्तुति, बबलू चंद्रा, नैनीताल
