यूपी में 20 % महंगी हो जाएगी बिजली, बढ़ोतरी के प्रस्ताव की सुनवाई को नियामक आयोग ने दी मंजूरी
लखनऊ, अमृत विचार : बिजली दरों में लगभग 20 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव को लेकर बिजली कंपनियों द्वारा दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) को राज्य विद्युत नियामक आयोग ने सुनवाई के लिए सशर्त मंजूरी दे दी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मार्च माह में एआरआर और उस पर प्राप्त आपत्तियों की विस्तार से सार्वजनिक सुनवाई के बाद ही बिजली की नई दरों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बिजली कंपनियों ने अपने एआरआर में 12,453 करोड़ रुपये के राजस्व अंतर यानी घाटे का दावा किया है। इसी घाटे की भरपाई के लिए बिजली दरों में इजाफे की जरूरत बताई जा रही है। आयोग ने सभी वितरण कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे तीन दिनों के भीतर अपने सभी आंकड़ों सहित एआरआर रिपोर्ट सार्वजनिक करें। इसके बाद उपभोक्ताओं, संगठनों और अन्य हितधारकों को आपत्तियां और सुझाव देने के लिए 21 दिन का समय मिलेगा।
महत्वपूर्ण यह है कि कंपनियों ने एआरआर में बिजली दरों में बढ़ोतरी का कोई स्पष्ट प्रस्ताव नहीं दिया है। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए आयोग ने आदेश दिया है कि एआरआर प्रकाशित करते समय यह भी बताया जाए कि घाटे की भरपाई के लिए दरों में कितनी बढ़ोतरी प्रस्तावित है।
वर्ष 2026-27 के लिए बिजली कंपनियों ने सरकार से 17,100 करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रस्ताव रखा है। इसके बावजूद 12,453 करोड़ रुपये का घाटा दिखाते हुए बिजली महंगी होने के संकेत दिए गए हैं। अनुमान है कि यदि यह घाटा दरों से वसूला गया तो बिजली करीब 20 प्रतिशत तक महंगी हो सकती है।
कंपनियों ने वितरण हानि को 13.07 प्रतिशत किए जाने और स्मार्ट प्रीपेड मीटर संचालन पर 3,837 करोड़ रुपये खर्च को भी दरों में शामिल करने की मांग की है। जबकि केंद्र सरकार और ऊर्जा मंत्री एके शर्मा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि स्मार्ट मीटर की लागत उपभोक्ताओं से नहीं ली जाएगी।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने एआरआर के आंकड़ों को मनगढ़ंत बताते हुए कहा कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं के करीब 51 हजार करोड़ रुपये बकाया हैं। अब सभी की नजरें मार्च में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।
