यूपी में बिजली चोरों पर 'OTS' भी बेकार... करोड़ों की छूट के बावजूद नहीं लिया लाभ, अब कनेक्शन कटन और कुर्की की तैयारी

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में बिजली चोरी सहित बकायेदारों से बिल की वसूली के मामलों के निपटारे के लिए शुरू की गई एकमुश्त समाधान योजना पॉवर कॉरपोरेशन की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई है। करोड़ों रुपये की छूट और मुकदमेबाजी से राहत के बावजूद प्रदेश भर में बिजली चोरी में पकड़े गए उपभोक्ता योजना से दूरी बनाए हुए हैं। अब तक केवल 12 प्रतिशत पात्र उपभोक्ताओं ने ही ओटीएस के तहत पंजीकरण कराया है, जिससे बिजली विभाग की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं।

ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी-26 तक बिजली चोरी के कुल 6.26 लाख मामले ओटीएस के लिए पात्र थे। इन मामलों में करीब 26,367.23 करोड़ रुपये की आंकी गई देनदारी और 1,560.80 करोड़ रुपये के कंपाउंडिंग चार्ज शामिल हैं। वहीं योजना लागू होने के बाद अब तक सिर्फ 75,277 उपभोक्ताओं ने पंजीकरण कराया, जबकि 51,557 मामलों का ही पूर्ण निस्तारण हो सका है। योजना के तहत अब तक 188.38 करोड़ रुपये की वसूली की जा सकी है। इसमें 149.63 करोड़ रुपये बकाया राशि और 38.75 करोड़ रुपये कंपाउंडिंग चार्ज से प्राप्त हुए हैं। इसके बदले बिजली कंपनियों ने 108.35 करोड़ रुपये की राशि माफ की है। 3 जनवरी को एक दिन में सर्वाधिक 4.57 करोड़ रुपये की वसूली दर्ज की गई थी, लेकिन इसके बाद राजस्व वसूली की रफ्तार सुस्त पड़ गई। कॉरपोरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे कम भागीदारी को गंभीर संरचनात्मक समस्या बताया। उनका कहना है कि यह स्थिति बताती है है कि विभाग की ओर से की जाने वाली कार्रवाई को उपभोक्ता गंभीरता से नहीं ले रहे है। या फिर बड़ी संख्या में उपभोक्ता अब भी औपचारिक बिलिंग व्यवस्था से बाहर हैं। वहीं यूपीपीसीएल के निदेशक (वाणिज्य) प्रशांत वर्मा ने कहा ने कहा कि बिजली चोरी में पकड़े गए उपभोक्ताओं की सीमित भागीदारी के कारणों का विश्लेषण किया जाएगा। फिलहाल हमारा फोकस सामान्य बकाया राशि की वसूली पर है।

उपभोक्ताओं ने योजना से बनाई दूरी

ओटीएस योजना को लाखों बकायेदार उपभोक्ताओं से राजस्व वसूली के उद्देश्य से तीन चरणों में लागू किया गया था। पहला और दूसरा चरण समाप्त हो चुका है, लेकिन अपेक्षित भागीदारी नहीं मिली। अब तीसरे चरण की शुरुआत हो चुकी है, जिसके साथ ही विभाग ने रुख सख्त कर लिया है।

डिस्कॉम-वार स्थिति

पंजीकरण के मामले में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम 24,773 से अधिक मामलों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में 24,033 से ज्यादा पंजीकरण दर्ज हुए हैं। प्रतिशत के लिहाज से पूर्वांचल सबसे आगे है, जहां 15.3 प्रतिशत पात्र उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया। वहीं कानपुर की केस्को सबसे पीछे है, जहां महज 8 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने ही पंजीकरण कराया।

योजना खत्म होने के बाद बकायेदारों पर होगी कार्रवाई

बिजली चोरी जैसे गंभीर अपराध पर राहत देने के बावजूद उपभोक्ताओं की उदासीनता के चलते विभाग की ओर से कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार कम पंजीकरण को देखते हुए बिजली विभाग ने संबंधित अधिकारियों को कनेक्शन काटने, कुर्की और अन्य कड़ी कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं। विभाग का मानना है कि यदि ओटीएस के बावजूद उपभोक्ता आगे नहीं आते, तो राजस्व हित में सख्त कदम उठाना जरूरी होगा।

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