शिक्षकों ने बजट पर रखी अपनी राय, कहा- संतुलन की कमी, शिक्षा-स्वास्थ्य में और बढ़ोतरी की मांग
अवध विश्वविद्यालय में बजट पर गहन परिचर्चा, सकारात्मक पहलुओं की सराहना के साथ कमियों पर सख्त राय
अयोध्या, अमृत विचार : डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में में केंद्र सरकार के आम बजट को लेकर शिक्षकों द्वारा एक महत्वपूर्ण परिचर्चा (पैनल डिस्कशन) का आयोजन किया गया। यह परिचर्चा विश्वविद्यालय के शिक्षकों और शोधकर्ताओं के बीच बजट के विभिन्न पहलुओं, जैसे शिक्षा, अर्थव्यवस्था, सामाजिक कल्याण और विकास योजनाओं पर केंद्रित रही। सभी प्रतिभागियों ने अपने विचार साझा किए, जिसमें बजट की सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्षों पर चर्चा।
अर्थशास्त्री प्रो. आशुतोष सिन्हा ने बजट को वर्तमान आर्थिक चुनौतियों के संदर्भ में विश्लेषित करते हुए कहा कि यह बजट विकास और समावेशिता पर फोकस करता है, लेकिन शिक्षा और रोजगार सृजन में और अधिक निवेश की आवश्यकता है। डॉ. अलका श्रीवास्तव ने महिलाओं और युवाओं से जुड़ी योजनाओं पर जोर देते हुए बजट की कुछ कमियों की ओर इशारा किया। जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में आवंटन को और बढ़ाने की मांग की।
डॉ. सरिता द्विवेदी ने ग्रामीण विकास और कृषि बजट पर अपनी राय रखी, जिसमें उन्होंने किसानों के लिए बेहतर समर्थन मूल्य और सिंचाई सुविधाओं की आवश्यकता बताई। डॉ. रीमा सिंह ने वित्तीय प्रबंधन के नजरिए से बजट की सराहना की। विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा के लिए फंडिंग में वृद्धि की वकालत की।युवा प्रतिभागियों अंशु वर्मा, शिफा रियाज़, सपना पाल, अमन वर्मा, वरुण सिंह और शिवम ने युवा-केंद्रित मुद्दों जैसे स्टार्टअप, स्किल डेवलपमेंट, रोजगार और डिजिटल इंडिया पर फोकस करते हुए बजट को युवाओं के अनुकूल बनाने की सिफारिशें दीं। उन्होंने कहा कि बजट में इंटर्नशिप और युवा उद्यमिता को बढ़ावा देने वाले प्रावधानों को और मजबूत किया जाना चाहिए। सभी ने आम बजट को एक संतुलित प्रयास बताया, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में अधिक प्राथमिकता देने की मांग की।
कांग्रेस महानगर अध्यक्ष सुनील कृष्ण गौतम रानू ने बजट की निंदा करते हुए कहा कि भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत 2026 का केंद्रीय बजट आम जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा उतरने में विफल रहा है। यह बजट गरीब, किसान, मजदूर, मध्यम वर्ग और युवाओं के हितों की अनदेखी करता है, जिसकी कांग्रेस पार्टी कड़े शब्दों में निंदा करती हैं। इस बजट में महंगाई, बेरोज़गारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों की आय जैसे ज्वलंत मुद्दों पर कोई ठोस और प्रभावी प्रावधान नहीं किया गया है। बढ़ती महंगाई से त्रस्त जनता को कोई राहत नहीं दी गई, वहीं रोजगार सृजन को लेकर भी सरकार की मंशा स्पष्ट नहीं दिखाई देती।
