योगी सरकार ने कर्मचारियों के खिलाफ लिया सख्त एक्शन, 68 हजार से अधिक का रोका वेतन, जानें वजह

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊः उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति को और मजबूत करते हुए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के 68,236 सरकारी कर्मचारियों का जनवरी 2026 का वेतन रोक दिया गया है, क्योंकि उन्होंने मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा अपलोड नहीं किया। इन कर्मचारियों को फरवरी में सैलरी नहीं मिलेगी—जब तक वे पोर्टल पर पूरी जानकारी दर्ज नहीं कराते।

क्या है पूरा मामला?

मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी विभागों को सख्त निर्देश दिए थे कि हर राज्यकर्मी (प्रथम से चतुर्थ श्रेणी तक) अपनी संपत्ति (चल और अचल) का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करे। यह नियम उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के तहत अनिवार्य है। अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 तय की गई थी।

इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने अनुपालन नहीं किया, जिसके बाद सरकार ने वेतन रोकने का फैसला लिया। शासन का साफ संदेश है—संपत्ति ब्यौरा ऑनलाइन दर्ज न करने पर सैलरी जारी नहीं होगी। आगे सख्त कार्रवाई (जैसे प्रमोशन रोकना या विभागीय जांच) भी संभव है।

श्रेणीवार ब्रेकडाउन: सबसे ज्यादा प्रभावित कौन?

- तृतीय श्रेणी कर्मचारी: 34,000+ (सबसे ज्यादा)
- चतुर्थ श्रेणी: 22,000+ 
- द्वितीय श्रेणी: 7,000+
- प्रथम श्रेणी: 2,000+
- अन्य श्रेणी: 854 (कुल 1,612 में से)

कुल मिलाकर 68,236 कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। प्रमुख विभाग जैसे लोक निर्माण, राजस्व, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण में सबसे ज्यादा गैर-अनुपालन देखा गया है।

सरकार का मकसद: पारदर्शिता और जवाबदेही

यह कदम अवैध संपत्ति निर्माण रोकने, प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने का हिस्सा है। योगी सरकार ने पहले भी ऐसे निर्देश जारी किए थे, लेकिन इस बार डेडलाइन सख्ती से लागू की गई। कर्मचारियों को सलाह है कि जल्द से जल्द पोर्टल पर संपत्ति विवरण अपडेट करें, ताकि सैलरी रिलीज हो सके और आगे कोई परेशानी न आए।

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