काशी में इस बार महाशिवरात्रि पर अनोखा संगम... बाबा विश्वनाथ और माता गौरा को पहली बार असमिया परिधान और आभूषणों से सजाया जाएगा
वाराणसीः महाशिवरात्रि (15 फरवरी) के अवसर पर काशी में शिव-विवाह की परंपरागत तैयारियां तेज हो गई हैं। टेढ़ीनीम स्थित विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास पर बाबा विश्वनाथ की हल्दी, शिव-विवाह, शिव बारात और गौना की रस्मों को लेकर भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। इस वर्ष पहली बार बाबा विश्वनाथ और माता गौरा की चल प्रतिमा को असमिया पारंपरिक परिधानों और आभूषणों से सजाया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
मंदिर के महंत वाचस्पति तिवारी ने बताया कि बाबा विश्वनाथ के लिए असम के ऐतिहासिक नगर शिवसागर से 'चेलेंग और गसोमा' परिधान मंगाए गए हैं, जो असम की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक हैं। वहीं माता गौरा को लाल-सुनहरे रंग की रेशमी 'मेखेला साड़ी' पहनाई जाएगी और उन्हें जूनबीरी (अर्धचंद्राकार हार), गुमखारू (कंगन) और थुरिया (मांगटिका) जैसे पारंपरिक असमिया आभूषणों से अलंकृत किया जाएगा। यह श्रृंगार काशी और असम की आध्यात्मिक परंपराओं के संगम का प्रतीक माना जा रहा है। श्रृंगार की तैयारी काशी की सांस्कृतिक कलाकार आकांक्षा गुप्ता द्वारा की जा रही है।
आयोजन समिति के संयोजक संजीव रत्न मिश्र ने बताया कि शिव बारात में शामिल प्रतिकात्मक बाबा विश्वनाथ की प्रतिमा को भी काशी में तैयार मलमल और जरी के राजसी परिधान पहनाए जाएंगे। 13 फरवरी को बाबा की हल्दी की रस्म अदा की जाएगी, जिसके बाद महाशिवरात्रि पर शिव-विवाह का भव्य आयोजन संपन्न होगा।
