बुंदेलखंड में ‘हर घर नल’ से बदली जिंदगी... गांव-गांव तक पाइपलाइन, सामाजिक सुरक्षा और स्वच्छता में सुधार

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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महिलाओं को पानी के लिए नहीं लगाने पड़ते चक्कर

लखनऊ, अमृत विचार: कभी पानी की किल्लत और पलायन के लिए चर्चित बुंदेलखंड में अब ‘हर घर नल’ योजना से नई उम्मीद की धारा बह रही है। जिन गांवों में महिलाएं सिर पर घड़ा रखकर दूर-दूर तक पानी लाने को मजबूर थीं, वहां अब घर-घर नल से स्वच्छ जल पहुंच रहा है। इससे न सिर्फ लोगों को राहत मिली है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और बच्चों की सेहत में भी सुधार आया है।

महोबा जिले में जल जीवन मिशन के तहत पांच परियोजनाओं के माध्यम से एक लाख 12 हजार से अधिक घरों तक पाइपलाइन कनेक्शन पहुंच चुका है। कभी यहां पानी के लिए वाटर ट्रेन चलाने की नौबत आई थी, लेकिन अब गांवों में खड़ी पानी की टंकियां बदले हालात की गवाही दे रही हैं। स्थानीय लोग मानते हैं कि निर्माण के दौरान कुछ असुविधा जरूर हुई, लेकिन अब हर घर नल से मिलने वाला पानी उनके लिए बड़ी राहत बन गया है। चित्रकूट में सिलौटा ग्राम समूह योजना के जरिए पहाड़ी, रामनगर और मानिकपुर क्षेत्र के करीब सवा लाख लोगों को पानी की सुविधा मिली है। यहां 17 ओवरहेड टैंकों और सैकड़ों किलोमीटर पाइपलाइन के जरिए यमुना नदी से शुद्ध किया गया पानी घरों तक पहुंचाया जा रहा है। पहले जिन गांवों में पानी की कमी के कारण बेटियों की शादी तक मुश्किल होती थी, वहां अब हालात बदल चुके हैं।

झांसी के दूरस्थ गांवों तक भी पाइपलाइन पहुंचने से लोगों की जिंदगी आसान हुई है। बंगरा ब्लॉक के गांवों में हजारों घरों में कनेक्शन दिए गए हैं। अब परिवारों को हैंडपंपों की लाइन से छुटकारा मिल गया है और सरकारी स्कूलों व स्वास्थ्य केंद्रों में भी स्वच्छ पानी उपलब्ध है। बांदा जिले में अमलीकौर और खटान पेयजल परियोजनाओं से 544 गांवों के 82 हजार से अधिक घरों तक पानी पहुंचाया जा चुका है, जबकि हमीरपुर में भी अधिकांश गांवों में नल से जलापूर्ति शुरू हो गई है। वर्षों से सूखे और पानी की कमी से जूझ रहे बुंदेलखंड के लिए यह योजना अब जीवन बदलने वाली पहल साबित हो रही है।

 

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