ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ईरानी राजदूत का बड़ा संदेश: चाबहार पोर्ट को बताया दोस्ती का मजबूत प्रतीक, जानें क्या-क्या बोले फथाली

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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नई दिल्ली: अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बावजूद ईरान भारत के साथ अपनी मजबूत साझेदारी को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने चाबहार बंदरगाह परियोजना को दोनों देशों के बीच सहयोग का जीवंत प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट साझा विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में अहम भूमिका निभा रहा है।

ईरानी दूतावास द्वारा आयोजित ईरानी राष्ट्रीय दिवस के स्वागत समारोह में बोलते हुए राजदूत फथाली ने जोर दिया कि भारत और ईरान के रिश्ते हजारों साल पुरानी साझा सभ्यता और इतिहास से गहरे जुड़े हुए हैं। यह सांस्कृतिक विरासत द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की सबसे बड़ी ताकत है।

भारत की ओर से मजबूत संदेश

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने हिस्सा लिया। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि भारत ईरान के साथ अपने स्थायी संबंधों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जॉर्ज ने ईरान की सरकार और लोगों को बधाई दी।

चाबहार: भारत के लिए रणनीतिक महत्व

चाबहार बंदरगाह भारत के लिए खासा अहम है क्योंकि यह पाकिस्तान को बायपास करके अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का वैकल्पिक रास्ता देता है। 2003 में भारत ने इसकी विकास की पहल की थी। अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे के तहत यह प्रोजेक्ट सड़क-रेल नेटवर्क से भारतीय व्यापार को नई दिशा देता है।

हालांकि, ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों ने परियोजना को कई बार प्रभावित किया, लेकिन दोनों देशों ने इसे आगे बढ़ाया। इंडियन पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) और ईरान के पोर्ट एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के बीच लंबे समय का समझौता हुआ, जो शाहिद बेहेश्टी टर्मिनल पर भारत की भूमिका को मजबूत करता है। यह 2016 के शुरुआती समझौते की जगह लेता है, जिसे पहले हर साल बढ़ाया जाता था।

चाबहार ने दी कई बार मदद

हाल के वर्षों में इस बंदरगाह का इस्तेमाल महत्वपूर्ण शिपमेंट्स के लिए हुआ है। उदाहरण के तौर पर:
- 2023 में अफगानिस्तान को 20,000 टन गेहूं की मानवीय सहायता भेजी गई।
- 2021 में ईरान को पर्यावरण-अनुकूल कीटनाशक पहुंचाए गए।

राजदूत फथाली के बयान से साफ है कि तनावपूर्ण वैश्विक माहौल के बावजूद भारत-ईरान संबंध मजबूत बने रहेंगे। चाबहार न सिर्फ आर्थिक, बल्कि रणनीतिक साझेदारी का मजबूत आधार बना हुआ है, जो दोनों देशों के लिए क्षेत्रीय स्थिरता और विकास में अहम योगदान दे रहा है।

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