US-India Energy Roundtable: ह्यूस्टन में बैठक ...भारत-अमेरिका ऊर्जा वार्ता में ऊर्जा प्राथमिकताओं पर जोर

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Published By Anjali Singh
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ह्यूस्टन। कौंसुल जनरल डी सी मंजुनाथ ने कहा कि भारत की तेज आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने की महत्वाकांक्षा दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा से गहराई से जुड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि भरोसेमंद एवं किफायती ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्वच्छ प्रौद्योगिकियों तथा नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी उद्योग के साथ संवाद और सहयोग बेहद अहम है।

ह्यूस्टन स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास (सीजीआई) ने यहां अपने कार्यालय में अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) के सहयोग से 'ग्लोबल एनर्जी आउटलुक' 2026 पर चार फरवरी को एक उच्चस्तरीय अमेरिका-भारत ऊर्जा गोलमेज बैठक आयोजित की। इस बैठक में वैश्विक ऊर्जा, इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी कंपनियों के 30 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

इनमें एक्सॉनमोबिल, शेवरॉन, हनीवेल, गेल, लार्सन एंड टुब्रो, वेदरफोर्ड, लैंजाटेक, एसएंडपी ग्लोबल, मैकिन्से और सोसाइटी ऑफ पेट्रोलियम इंजीनियर्स के प्रतिनिधि शामिल थे। भारत के महावाणिज्य दूतावास ने कहा कि यह गोलमेज बैठक साझा ऊर्जा चुनौतियों और व्यावसायिक अवसरों पर नीति निर्माताओं तथा उद्योग जगत के लोगों के बीच संवाद के लिए मंच उपलब्ध कराने के उसके निरंतर प्रयासों का हिस्सा है। यह गोलमेज बैठक फरवरी 2026 के भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे पर सहमति बनने के बाद हुई। इसमें ऊर्जा एवं प्रौद्योगिकी सहयोग को द्विपक्षीय वृद्धि के प्रमुख कारक के रूप में चिह्नित किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि लांजा टेक तथा हनीवेल जैसी कंपनियों की भागीदारी भारत के औद्योगिक और विमानन क्षेत्रों से जुड़ी सतत विमानन ईंधन एवं कार्बन पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियों में बढ़ती व्यावसायिक रुचि को दर्शाती है। यूएसआईएसपीएफ के अनुसार, चर्चाएं वैश्विक आपूर्ति-मांग रुझानों, अवसंरचना निवेश और नीतिगत ढांचों पर केंद्रित रहीं जो अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों और भारतीय सार्वजनिक व निजी क्षेत्र की कंपनियों के बीच गहरे व्यावसायिक जुड़ाव को संभव बना सकती हैं।

एक्सॉनमोबिल में अर्थशास्त्र एवं ऊर्जा के कॉरपोरेट निदेशक प्रसन्ना वी. जोशी द्वारा प्रस्तुत 'ग्लोबल एनर्जी आउटलुक' में आने वाले दशकों में भारत की ऊर्जा मांग में निरंतर वृद्धि के अनुमान पेश किए गए जो औद्योगिक विस्तार, शहरीकरण और बढ़ती बिजली खपत से प्रेरित होगी। प्रतिभागियों ने कहा कि भारत की निकट-अवधि की प्राथमिकताओं में एलएनजी और प्राकृतिक गैस अवसंरचना का विस्तार, बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाना तथा उद्योग और डेटा सेंटर से बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में डिजिटल एवं उन्नत प्रौद्योगिकियों की तैनाती शामिल है। 

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