संभल हिंसा: अनुज चौधरी समेत पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर के आदेश पर रोक
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल में नवंबर 2024 को हुई हिंसा से जुड़े मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) द्वारा पारित उस आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, जिसमें डीएसपी अनुज चौधरी सहित अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। उक्त आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने संभल सर्कल अधिकारी अनुज चौधरी और संभल कोतवाली के पूर्व प्रभारी अनुज तोमर की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
कोर्ट ने मूल शिकायतकर्ता को याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 14 दिन का समय दिया है। इस अवधि के दौरान स्थगन आदेश प्रभावी रहेगा, साथ ही कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि प्रति-शपथपत्र दाखिल होने के बाद मामले की सुनवाई योग्यता के प्रश्न पर विचार करने का अधिकार कोर्ट के पास सुरक्षित रहेगा। सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने तर्क दिया कि मजिस्ट्रेट ने बीएनएसएस के तहत निर्धारित अनिवार्य सुरक्षा प्रावधानों की अनदेखी की और संबंधित पुलिस अधिकारियों को आरोपों पर अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया, जिससे आदेश कानून की सीमाओं से परे है। वहीं, दूसरी ओर शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी ने याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति जताते हुए कहा कि राज्य सरकार अपने अधीन कार्यरत पुलिस अधिकारियों का संरक्षण कर रही है। उन्होंने तर्क दिया कि अपर मुख्य सचिव गृह (एसीएस) को नागरिकों के संरक्षक के रूप में निष्पक्ष भूमिका निभानी चाहिए।
गली सुनवाई तक आक्षेपित आदेश के क्रियान्वयन पर रोक जारी
कोर्ट ने अगली सुनवाई तक आक्षेपित आदेश के क्रियान्वयन पर रोक जारी रखी। बता दें कि यह आक्षेपित आदेश पिछले माह संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभान्शु सुधीर ने एक घायल युवक के पिता यामीन की अर्जी पर पारित किया था। जिसमें आरोप लगाया गया था कि हिंसा के दौरान पुलिस अधिकारियों ने उनके बेटे को जान से मारने के इरादे से गोली चलाई। इस आदेश के एक सप्ताह बाद ही सीजेएम विभान्शु सुधीर का तबादला सुल्तानपुर कर दिया गया।
